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#मेरी हृदय मेरी माँ
मेरी हृदय मेरी माँ - माँ भीतर बसे उस गहन सागर-्सी है जो बाहर उठते तूफानों से विचलित नहीं होती चाहे लहरें जितनी उग्र हों पर उसकी गहराई में सदा शांति रहती 81 माँ भीतर बसे उस गहन सागर-्सी है जो बाहर उठते तूफानों से विचलित नहीं होती चाहे लहरें जितनी उग्र हों पर उसकी गहराई में सदा शांति रहती 81 - ShareChat