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🌿🙏🌿BLOGGER=} 🙏♥️हिन्दी भोजपूरी गीत राईटर🌿🙏🌿
#मेरी हृदय मेरी माँ
मेरी हृदय मेरी माँ - केवल भोलेपन से जीवन नहीं जीया जा रखनी होंगी, विवेक सकता। आँखें பளி जागृत रखना होगा। क्योंकि विपत्ति, छल, अज्ञान और असावधानी में बुद्धि और विवेक शत्रु छिपे होते हैं। यही छिपे हुए शत्रु भीतर چ जीवन में कई विपत्तियाँ लाते हैं। जब मन लगता है, तभी शिव चेतना दिखाई देती डूबने है। जीवन संघर्षों से भरा है। संकट में ईश्वर और आत्मचिंतन सहारा बनते हैं। केवल धैर्य, विवेक और चेतना से ही इन्हें पार किया जा सकता है। केवल भोलेपन से जीवन नहीं जीया जा रखनी होंगी, विवेक सकता। आँखें பளி जागृत रखना होगा। क्योंकि विपत्ति, छल, अज्ञान और असावधानी में बुद्धि और विवेक शत्रु छिपे होते हैं। यही छिपे हुए शत्रु भीतर چ जीवन में कई विपत्तियाँ लाते हैं। जब मन लगता है, तभी शिव चेतना दिखाई देती डूबने है। जीवन संघर्षों से भरा है। संकट में ईश्वर और आत्मचिंतन सहारा बनते हैं। केवल धैर्य, विवेक और चेतना से ही इन्हें पार किया जा सकता है। - ShareChat
#मेरी हृदय मेरी माँ
मेरी हृदय मेरी माँ - मत पूछो कि कांटे भरे रास्ते के बाद क्या मिलेगा| धैर्य और परिश्रम से ही विजय , शांति और छाँव मिलती है। वाणी और अंतरात्मा चेतावनी देती है और संभालती है। जीवन संदेश देता है किजो अंत तक टिकता है, वही शांति पाता है। इसे हम खंड आशा और साधना कहते हैं। मत पूछो कि कांटे भरे रास्ते के बाद क्या मिलेगा| धैर्य और परिश्रम से ही विजय , शांति और छाँव मिलती है। वाणी और अंतरात्मा चेतावनी देती है और संभालती है। जीवन संदेश देता है किजो अंत तक टिकता है, वही शांति पाता है। इसे हम खंड आशा और साधना कहते हैं। - ShareChat
#मेरी हृदय मेरी माँ
मेरी हृदय मेरी माँ - जीवन का मार्ग अक्सर कंकड़, पत्थर और चट्टानों से भरा होता है।दिल डरता है, रास्ता टेढ़ा लगता है, मन आकुल होता है। पर उसी संघर्ष में छिपी होती है शांति। आत्मा पुकारती है, रूह मार्ग दिखाती है। टकराव और संघर्ष अजीब होते हैं, पर सबसे बड़ा युद्ध स्वयं के भीतर होता है इसी को हम आंतरिक संघर्ष कहते हैं। जीवन का मार्ग अक्सर कंकड़, पत्थर और चट्टानों से भरा होता है।दिल डरता है, रास्ता टेढ़ा लगता है, मन आकुल होता है। पर उसी संघर्ष में छिपी होती है शांति। आत्मा पुकारती है, रूह मार्ग दिखाती है। टकराव और संघर्ष अजीब होते हैं, पर सबसे बड़ा युद्ध स्वयं के भीतर होता है इसी को हम आंतरिक संघर्ष कहते हैं। - ShareChat
#मेरी हृदय मेरी माँ
मेरी हृदय मेरी माँ - गंगासागर जीवन असीमित है। इसमें अनुभव, ज्ञान, पुण्य और चुनौतियाँ भरी हुई हैं। जीवन के अलग-्अलग अनुभव, रिश्ते और भावनाएँ अंततः आत्मा और पहुँचने का मार्ग बनते हैं। ज्ञान तक जीवन सहज नहीं है। दुख, संकट और विपत्तियाँ निरंतर आती रहती हैं। सुख क्षणिक है, संघर्ष स्थायी। यही जीवन की वास्तविकता है संघर्ष से भागा नहीं जा সব্না| गंगासागर जीवन असीमित है। इसमें अनुभव, ज्ञान, पुण्य और चुनौतियाँ भरी हुई हैं। जीवन के अलग-्अलग अनुभव, रिश्ते और भावनाएँ अंततः आत्मा और पहुँचने का मार्ग बनते हैं। ज्ञान तक जीवन सहज नहीं है। दुख, संकट और विपत्तियाँ निरंतर आती रहती हैं। सुख क्षणिक है, संघर्ष स्थायी। यही जीवन की वास्तविकता है संघर्ष से भागा नहीं जा সব্না| - ShareChat
#मेरी हृदय मेरी माँ
मेरी हृदय मेरी माँ - शिव संहार नहीं बल्कि कल्याण और चेतना के देव हैं। संकट के समय मन ईश्वर की शरण लेता है। गंगासागर जीवन का प्रतीक हैएक ऐसा सागर जो पवित्र स्थल के साथ-साथ गंगा नदी और समुद्र से मिलता है। यह जीवन में शुद्धि, पुण्य और अनंतता का संकेत देता है। शिव संहार नहीं बल्कि कल्याण और चेतना के देव हैं। संकट के समय मन ईश्वर की शरण लेता है। गंगासागर जीवन का प्रतीक हैएक ऐसा सागर जो पवित्र स्थल के साथ-साथ गंगा नदी और समुद्र से मिलता है। यह जीवन में शुद्धि, पुण्य और अनंतता का संकेत देता है। - ShareChat
#मेरी हृदय मेरी माँ
मेरी हृदय मेरी माँ - डूबना केवल शारीरिक नहीं है, बल्कि यह मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक संघर्ष का संकेत है। यह जीवन में आए गहरे संकट का प्रतीक बनकर उभरता है। जब मनुष्य टूटने लगता है, तब वह बड़ी सोच, यानी ईश्वर, गुरु और आत्मचिंतन की ओर मुड़ता है। डूबना केवल शारीरिक नहीं है, बल्कि यह मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक संघर्ष का संकेत है। यह जीवन में आए गहरे संकट का प्रतीक बनकर उभरता है। जब मनुष्य टूटने लगता है, तब वह बड़ी सोच, यानी ईश्वर, गुरु और आत्मचिंतन की ओर मुड़ता है। - ShareChat
#मेरी हृदय मेरी माँ
मेरी हृदय मेरी माँ - = = - ShareChat
#मेरी हृदय मेरी माँ
मेरी हृदय मेरी माँ - विवेक का जागरण तभी होता है जब इन्द्रियाँ स्वामी नहीं, साधन बनती हैं मन निर्देशन में आता है और चेतना साक्षीभाव में स्थिर होती है तभी वही कर्म योग बनता है बंधन नहीं , সু্নি प्रक्रिया है। विवेक का जागरण तभी होता है जब इन्द्रियाँ स्वामी नहीं, साधन बनती हैं मन निर्देशन में आता है और चेतना साक्षीभाव में स्थिर होती है तभी वही कर्म योग बनता है बंधन नहीं , সু্নি प्रक्रिया है। - ShareChat
#मेरी हृदय मेरी माँ
मेरी हृदय मेरी माँ - जब चेतना सोई होती है तब कर्म तो होता है,पर योग नहीं होता क्योंकि योग के लिए स्मृति चाहिए मैं कर्ता नहीं , मैं साक्षी हूँ तब कर्म बंधन बन जाता है क्योंकि उसमें फल आकांक्षा और अहंकार जुड़ा होता है धर्म भी स्वार्थ से रंग जाता है धर्म साधना न रहकर पहचान, पद, या मान का साधन बन जाता है सेवा भी अहंकार से दूषित हो जाती है मैं कर रहा हूँ मेरे कारण हुआ यही बंधन है! जब चेतना सोई होती है तब कर्म तो होता है,पर योग नहीं होता क्योंकि योग के लिए स्मृति चाहिए मैं कर्ता नहीं , मैं साक्षी हूँ तब कर्म बंधन बन जाता है क्योंकि उसमें फल आकांक्षा और अहंकार जुड़ा होता है धर्म भी स्वार्थ से रंग जाता है धर्म साधना न रहकर पहचान, पद, या मान का साधन बन जाता है सेवा भी अहंकार से दूषित हो जाती है मैं कर रहा हूँ मेरे कारण हुआ यही बंधन है! - ShareChat
#मेरी हृदय मेरी माँ
मेरी हृदय मेरी माँ - कर्म होता है, पर योग नहीं होता जब चेतना सोई होती है कर्म बंधन बनता है धर्म भी स्वार्थ से जुड़ जाता है सेवा भी अहंकार से दूषित हो जाती है यानी जब इन्द्रियाँ राज करती हैं तो विवेक सोया रहता है। कर्म होता है, पर योग नहीं होता जब चेतना सोई होती है कर्म बंधन बनता है धर्म भी स्वार्थ से जुड़ जाता है सेवा भी अहंकार से दूषित हो जाती है यानी जब इन्द्रियाँ राज करती हैं तो विवेक सोया रहता है। - ShareChat