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#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana
satnam waheguru ji - 96 सभि सत सभि तप सभि चंगिआईआI। सिधा पुरखा कीआ वडिआईआ II सिधी किनै न पाईआIl fu तुधु करमि मिलै नाही ठाकि रहाईआI। अर्थः सत्य का पालन करना , शरीर और मन मीठा को साधने वाली कठिन तपस्या और नेक कर्म करना , ये तीनों गुण मनुष्य के श्रेष्ठ होने ये मनुष्य  ৯ সসাতা নী ঔ লক্িন को अभिमानी भी बना सकते हैं। इसलिए, इन्हें अपनी उपलब्धि मानने के बजाय उसकी देन मानना ही असली ज्ञान है।जो लोग लगे सिद्धियों के स्वामी बन जाते हैं॰ उनकी महिमा भी उनकी अपनी नहीं है बल्कि उस सिद्ध परमात्मा की इच्छा के बिना कोई भी नहीं हो सकता। परमात्मा की वडिआई तेरा का अंत कोई नहीं पा सका। बड़े बड़े सिद्धों के पास जो सामर्थ्य है, वह तेरी ही दी हुई चमक है। बिना परमात्मा की इच्छा और सहयोग के, कोई भी प्रयास अपने अंतिम लक्ष्य तक नहीं पहुँच सकता। हे भाई! जब परमात्मा किसी कार्य को सिद्ध करने की भाणा कृपा करता है॰ तो ब्रह्मांड की कोई भी शक्ति, चाहे वह कितनी भी प्रबल क्यों न हो, उसमें बाधा नहीं डाल सकती। वह कार्य अखंड और अटल हो जाता है। यह शब्द मनुष्य को अहंकार से मुक्ति और परमात्मा पर पूर्ण समर्पण सिखाता है कि विचारवानों के विचार और सिद्धों की शक्तियाँ सब उसी एक ही समुद्र की बूंदें हैं। जब उसकी कृपा का प्रवाह चलता है, तो सारे मार्ग स्वतः ही खुल जाते हैं। 96 सभि सत सभि तप सभि चंगिआईआI। सिधा पुरखा कीआ वडिआईआ II सिधी किनै न पाईआIl fu तुधु करमि मिलै नाही ठाकि रहाईआI। अर्थः सत्य का पालन करना , शरीर और मन मीठा को साधने वाली कठिन तपस्या और नेक कर्म करना , ये तीनों गुण मनुष्य के श्रेष्ठ होने ये मनुष्य  ৯ সসাতা নী ঔ লক্িন को अभिमानी भी बना सकते हैं। इसलिए, इन्हें अपनी उपलब्धि मानने के बजाय उसकी देन मानना ही असली ज्ञान है।जो लोग लगे सिद्धियों के स्वामी बन जाते हैं॰ उनकी महिमा भी उनकी अपनी नहीं है बल्कि उस सिद्ध परमात्मा की इच्छा के बिना कोई भी नहीं हो सकता। परमात्मा की वडिआई तेरा का अंत कोई नहीं पा सका। बड़े बड़े सिद्धों के पास जो सामर्थ्य है, वह तेरी ही दी हुई चमक है। बिना परमात्मा की इच्छा और सहयोग के, कोई भी प्रयास अपने अंतिम लक्ष्य तक नहीं पहुँच सकता। हे भाई! जब परमात्मा किसी कार्य को सिद्ध करने की भाणा कृपा करता है॰ तो ब्रह्मांड की कोई भी शक्ति, चाहे वह कितनी भी प्रबल क्यों न हो, उसमें बाधा नहीं डाल सकती। वह कार्य अखंड और अटल हो जाता है। यह शब्द मनुष्य को अहंकार से मुक्ति और परमात्मा पर पूर्ण समर्पण सिखाता है कि विचारवानों के विचार और सिद्धों की शक्तियाँ सब उसी एक ही समुद्र की बूंदें हैं। जब उसकी कृपा का प्रवाह चलता है, तो सारे मार्ग स्वतः ही खुल जाते हैं। - ShareChat