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#दुःख #दुख #dukh #life #by sameer dharmik
दुःख - 'ತ आता है॰ जाता है। सुख भी आता है और जाता है।जो न आता कभी और जान कभी जाता है॰ उसका नाम ही आनंद है।जो है ही हमारे भीतर  जो हमारा स्वभाव है॰ स्वरूप है।जो भी आता है और जाता है॰ वह पर भाव है। वह स्वभाव नहीं है। वह हम नहीं जो भी हम पर आ जाता है और चला जाता है, वह हम नहीं हैं। हम तो वह हैं, जिस पर दुख आता है जिस पर सुख आता है। हम भिन्न हैं। जिस पर सुखनदुख आते हैं, वह स्वभाव आनंद स्वरूप है। पर हमें उस स्वभाव का पता ही नहीं चलता। हम उसमें ही उलझे रहते हैं, जो आता है और जाता है। ओशो॰ I Osho ~P-muPuc Normooo uaaa ९० 'ತ आता है॰ जाता है। सुख भी आता है और जाता है।जो न आता कभी और जान कभी जाता है॰ उसका नाम ही आनंद है।जो है ही हमारे भीतर  जो हमारा स्वभाव है॰ स्वरूप है।जो भी आता है और जाता है॰ वह पर भाव है। वह स्वभाव नहीं है। वह हम नहीं जो भी हम पर आ जाता है और चला जाता है, वह हम नहीं हैं। हम तो वह हैं, जिस पर दुख आता है जिस पर सुख आता है। हम भिन्न हैं। जिस पर सुखनदुख आते हैं, वह स्वभाव आनंद स्वरूप है। पर हमें उस स्वभाव का पता ही नहीं चलता। हम उसमें ही उलझे रहते हैं, जो आता है और जाता है। ओशो॰ I Osho ~P-muPuc Normooo uaaa ९० - ShareChat