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new - प्रेम की जड़ें वह एक फ़ूल, जो कभी तोहफे में मिला  था, अब मेरी रूह के आँगन में जड़ें G 5 60 हवा चलनी है ढो उसकी खुशबू तेरा नाम लेनी है॰ जैसे कोई से चुपके IgIT याद मुझे थाम लेनी है। जबनजब उसकी मिट्टी को G6எ & हकीकन में॰ मैं तेरे और करीब ! आता fg द्रुनिया के चो बस एक शाख और पचती है॰ पर मेरे वो ढैरे इश्क की fg जलनी हुई बत्ती है। फासलों ने कभषी हमारे बीच दीवार नहीं उठाई, बल्कि डख् षैधी ने दूरी में भ्षी मोहब्बन निभाई। ढू साथ नहीं॰ फिर भ्षी ढू हर पल 7y 5 इस खिलने हु९ घ्ुलाब में बस तेरी ৫্রuন টI [ प्रेम की जड़ें वह एक फ़ूल, जो कभी तोहफे में मिला  था, अब मेरी रूह के आँगन में जड़ें G 5 60 हवा चलनी है ढो उसकी खुशबू तेरा नाम लेनी है॰ जैसे कोई से चुपके IgIT याद मुझे थाम लेनी है। जबनजब उसकी मिट्टी को G6எ & हकीकन में॰ मैं तेरे और करीब ! आता fg द्रुनिया के चो बस एक शाख और पचती है॰ पर मेरे वो ढैरे इश्क की fg जलनी हुई बत्ती है। फासलों ने कभषी हमारे बीच दीवार नहीं उठाई, बल्कि डख् षैधी ने दूरी में भ्षी मोहब्बन निभाई। ढू साथ नहीं॰ फिर भ्षी ढू हर पल 7y 5 इस खिलने हु९ घ्ुलाब में बस तेरी ৫্রuন টI [ - ShareChat