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##भगवद गीता🙏🕉️ #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏 प्रेरणादायक विचार #❤️जीवन की सीख #मेरे विचार
#भगवद गीता🙏🕉️ - युञ्जन्नेवं   सदात्मानं योगी   नियतमानसः | शान्तिं निर्वाणपरमां मत्संस्थामधिगच्छति Il वशमें किये हुए मनवाला योगी इस प्रकार आत्माको निरन्तर मुझ परमेश्वरके स्वरूपमें लगाता रहनेवाली परमानन्दको पराकाष्ठारूप हुआ मुझमें शान्तिको प्राप्त होता हैIl १५ ।l नात्यश्नतस्तु योगोडस्ति न चैकान्तमनश्नतः | न चाति स्वप्नशीलस्य जाग्रतो नैव चार्जुन।। हे अर्जुन! यह योग न तो वहुत खानेवालेका, न विलकुल न खानेवालेका, न वहुत शयन करनेके  स्वभाववालेका और न 6 எ்ளள் = Tis ఃIT గైII ?6 Il कर्मसु " युक्ताहारविहारस्य  युक्तचेप्टस्य  युक्तस्वप्नावबोधस्य योगो भवति दुःखहा Il दुःखोंका नाश करनेवाला योग तो यथायोग्य आहार - विहार करनेवालेका, कर्मोंमें यथायोग्य चेष्टा करनेवालेका और यथायोग्य सोने तथा जागनेवालेका हा सिद्ध होता है Il १७ ।। श्रीमद्भगवद् गीता अध्याय 6 प्रेस , गोरखपूर से सामार गीता युञ्जन्नेवं   सदात्मानं योगी   नियतमानसः | शान्तिं निर्वाणपरमां मत्संस्थामधिगच्छति Il वशमें किये हुए मनवाला योगी इस प्रकार आत्माको निरन्तर मुझ परमेश्वरके स्वरूपमें लगाता रहनेवाली परमानन्दको पराकाष्ठारूप हुआ मुझमें शान्तिको प्राप्त होता हैIl १५ ।l नात्यश्नतस्तु योगोडस्ति न चैकान्तमनश्नतः | न चाति स्वप्नशीलस्य जाग्रतो नैव चार्जुन।। हे अर्जुन! यह योग न तो वहुत खानेवालेका, न विलकुल न खानेवालेका, न वहुत शयन करनेके  स्वभाववालेका और न 6 எ்ளள் = Tis ఃIT గైII ?6 Il कर्मसु " युक्ताहारविहारस्य  युक्तचेप्टस्य  युक्तस्वप्नावबोधस्य योगो भवति दुःखहा Il दुःखोंका नाश करनेवाला योग तो यथायोग्य आहार - विहार करनेवालेका, कर्मोंमें यथायोग्य चेष्टा करनेवालेका और यथायोग्य सोने तथा जागनेवालेका हा सिद्ध होता है Il १७ ।। श्रीमद्भगवद् गीता अध्याय 6 प्रेस , गोरखपूर से सामार गीता - ShareChat