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जलालुद्दीन रुमी का कलाम अनुवादित #सूफी काव्य
सूफी काव्य - " जलालुद्दीन रुमी का कलाम अनुवादित" किनारा नहीं इस बयाबान में नहीं है क़रार इस दिल ओ ्जान में जहाँ दर जहाँ नक़्श तज्सीम हैं हमारे वुजूद इन में हैं कौन से सर आए रह में नज़र gtaT ut लुढ़कता रवाँ हो जो मैदान में तू असरार ए-दिल उस से पूछ उस से पूछ सुना देगा सिर्र-ए-निहाँ आन में कहूँ क्या करूँ क्या कि ये दास्ताँ नहीं है मिरे हद्द ओ इम्कान में बहम उड़ रहे हैं कबक और बाज़ हमारे अनोखे कुहिसतान में सात अफ़्लाक से है जो ' अर्श ৪ম ওম মদ ওভন ৯ তলান ম सलाह एन्हक़ ओ दीं दिखा दे तुझे कि क्या हुस्न था मेरे सुलतान में App Want Motivational Videos " जलालुद्दीन रुमी का कलाम अनुवादित" किनारा नहीं इस बयाबान में नहीं है क़रार इस दिल ओ ्जान में जहाँ दर जहाँ नक़्श तज्सीम हैं हमारे वुजूद इन में हैं कौन से सर आए रह में नज़र gtaT ut लुढ़कता रवाँ हो जो मैदान में तू असरार ए-दिल उस से पूछ उस से पूछ सुना देगा सिर्र-ए-निहाँ आन में कहूँ क्या करूँ क्या कि ये दास्ताँ नहीं है मिरे हद्द ओ इम्कान में बहम उड़ रहे हैं कबक और बाज़ हमारे अनोखे कुहिसतान में सात अफ़्लाक से है जो ' अर्श ৪ম ওম মদ ওভন ৯ তলান ম सलाह एन्हक़ ओ दीं दिखा दे तुझे कि क्या हुस्न था मेरे सुलतान में App Want Motivational Videos - ShareChat