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#☝ मेरे विचार
☝ मेरे विचार - 0 1(70ನ 0 अपने रास्ते ठीक से चलें  किसी का रास्ता क्यों रोकें राजा और साधु में विवाद के कई प्रसंग शास्त्रों में आए है।जो सांसारिक दृष्टि से सफल हो और निजी दृष्टि से संतुष्ट- वो साज्धु  है। हमारे यहां तीन लोगों को महाराज कहा जाता है। साधु और रसोई बनाने वाले को और ये तीनों ही जीवन मेँ बड़े च्ित्तपर्हणो हैं। संसार जब और राजा को उलझते देखता है॰ तो चिंतित औधु जाता है। साधु राजा जब भी विवाद करेंगे साधु का वर्तमान बिगड़ेगा और राजा का भविष्य। एक कथा आती है कि वशिष्ठ के पुत्र शक्ति एक बार पुल पार कर रहे थे और वहां से एक राजा आ रहे थे कलमाशपदा। दोनों इस पर उलझ गए कि पीछे कौन ತಞ क्योंकि पुल संकरा था और कोई एक ही गुजर सकता है। राजा  पद का अहंकार था, साधु को तप का। साधु ने राजा को राक्षस का शाप दिया। राजा राक्षस हुआ और साधु को खा गया। दोनों खत्म हो गए। कहानी यह समझा गई कि अपने अपने रास्ते ठीक से चलो  क्यों किसी का रास्ता रोकते हो? साधु का अपना मार्ग है॰ राजा का अपना राजपथ है। Facebook:Pt Vijayshankar Mehta  0 1(70ನ 0 अपने रास्ते ठीक से चलें  किसी का रास्ता क्यों रोकें राजा और साधु में विवाद के कई प्रसंग शास्त्रों में आए है।जो सांसारिक दृष्टि से सफल हो और निजी दृष्टि से संतुष्ट- वो साज्धु  है। हमारे यहां तीन लोगों को महाराज कहा जाता है। साधु और रसोई बनाने वाले को और ये तीनों ही जीवन मेँ बड़े च्ित्तपर्हणो हैं। संसार जब और राजा को उलझते देखता है॰ तो चिंतित औधु जाता है। साधु राजा जब भी विवाद करेंगे साधु का वर्तमान बिगड़ेगा और राजा का भविष्य। एक कथा आती है कि वशिष्ठ के पुत्र शक्ति एक बार पुल पार कर रहे थे और वहां से एक राजा आ रहे थे कलमाशपदा। दोनों इस पर उलझ गए कि पीछे कौन ತಞ क्योंकि पुल संकरा था और कोई एक ही गुजर सकता है। राजा  पद का अहंकार था, साधु को तप का। साधु ने राजा को राक्षस का शाप दिया। राजा राक्षस हुआ और साधु को खा गया। दोनों खत्म हो गए। कहानी यह समझा गई कि अपने अपने रास्ते ठीक से चलो  क्यों किसी का रास्ता रोकते हो? साधु का अपना मार्ग है॰ राजा का अपना राजपथ है। Facebook:Pt Vijayshankar Mehta - ShareChat