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#शहीद दिवस #बलिदान दिवस #🙏🏻माँ तुझे सलाम #🇮🇳 देशभक्ति
शहीद दिवस - हरनाम सिंह सैनी को डच उपनिवेश बटाविया में गिरफ्तार किया उनके पास या उनके द्वारा यात्रा किए जा रहे जहाज गया था। मैवरिक पर कुछ भी आपत्तिजनक नहीं मिला। इसके बावजूद बटाविया के डच अधिकारियों ने ब्रिटिश पर ध्यान दिया अनुरोध Rg और उन्हें पुलिस को सौंप दिया। उन्हें कलकत्ता और फिर लाहौर ले जाया गया। [ १ ] [ २ ] मुकदमा और फांसी लाहौर में तीसरे षड्यंत्र मामले में उन पर मुकदमा चलाया गया। इस मामले के न्यायाधिकरण में एलिस, मेजर फ्रिज़ेल और राय बहादुर गोपाल दास भंडारी शामिल थे। मुकदमा लाहौर सेंट्रल जेल में [2] चला मुकदमा 8 नवंबर १९१६ को शुरू हुआ और 5 जनवरी १९१७ को समाप्त हुआ। हरनाम सिंह सैनी और चार अन्य ग़दर क्रांतिकारियों  खुर्दपुर के भाई बलवंत सिंह, फतेहगढ़ के बाबू राम, जगराओं के हाफ़िज़ अब्दुल्ला और सांगोवाल के डॉ. अरूर सिंह पर बादशाह और सम्राट के खिलाफ युद्ध छेड़ने का आरोप लगाया गया और उन्हें मृत्युदंड दिया गया। तीन अन्य आरोपियों, करार सिंह नवां चंद, फतेहगढ़ के फ़ज़ल दीन और जंडियाला के मुनशा सिंह दुखी को आजावन कारावासादया गया L 2 ] सैनी को उनके चार अन्य ग़दर पार्टी साथियों के साथ १६ माच १९१७ को फाँसी दे दी गई। [ १ ] उनकी सभा सपत्तियों को भी जब्त कर लिया गया। [ २ ] हरनाम सिंह सैनी को डच उपनिवेश बटाविया में गिरफ्तार किया उनके पास या उनके द्वारा यात्रा किए जा रहे जहाज गया था। मैवरिक पर कुछ भी आपत्तिजनक नहीं मिला। इसके बावजूद बटाविया के डच अधिकारियों ने ब्रिटिश पर ध्यान दिया अनुरोध Rg और उन्हें पुलिस को सौंप दिया। उन्हें कलकत्ता और फिर लाहौर ले जाया गया। [ १ ] [ २ ] मुकदमा और फांसी लाहौर में तीसरे षड्यंत्र मामले में उन पर मुकदमा चलाया गया। इस मामले के न्यायाधिकरण में एलिस, मेजर फ्रिज़ेल और राय बहादुर गोपाल दास भंडारी शामिल थे। मुकदमा लाहौर सेंट्रल जेल में [2] चला मुकदमा 8 नवंबर १९१६ को शुरू हुआ और 5 जनवरी १९१७ को समाप्त हुआ। हरनाम सिंह सैनी और चार अन्य ग़दर क्रांतिकारियों  खुर्दपुर के भाई बलवंत सिंह, फतेहगढ़ के बाबू राम, जगराओं के हाफ़िज़ अब्दुल्ला और सांगोवाल के डॉ. अरूर सिंह पर बादशाह और सम्राट के खिलाफ युद्ध छेड़ने का आरोप लगाया गया और उन्हें मृत्युदंड दिया गया। तीन अन्य आरोपियों, करार सिंह नवां चंद, फतेहगढ़ के फ़ज़ल दीन और जंडियाला के मुनशा सिंह दुखी को आजावन कारावासादया गया L 2 ] सैनी को उनके चार अन्य ग़दर पार्टी साथियों के साथ १६ माच १९१७ को फाँसी दे दी गई। [ १ ] उनकी सभा सपत्तियों को भी जब्त कर लिया गया। [ २ ] - ShareChat