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#भाँति-भाँति के इत्र बेचती
भाँति-भाँति के इत्र बेचती - भाँतिनभाँति के इत्र बेचती गन्धी बनी आज अमराई महुए के रस में घुलते 94<49چ चुनते चुनते भटक गए भोले चरवाहे | एक फूल रजनीगन्धा का साँझनसकारे चैता की बहती स्वर- लहरी में अवगाहे | नयनन्नयन में धँसती जाती कोपलों की अरुणाई | तरुण कुलदेवी की बाँह बँधे सपता के डोरे बनजारे की बाट रोकते எRR नाहक धूम मची विप्लव की যাঁব-যাঁব সী वात्याचक्र जिधर उन्मद गजनसा मुँह मोड़े | छीन लिया सर्वस्व नीम ने टेकर बौरा्ई। TTF भाँतिनभाँति के इत्र बेचती गन्धी बनी आज अमराई महुए के रस में घुलते 94<49چ चुनते चुनते भटक गए भोले चरवाहे | एक फूल रजनीगन्धा का साँझनसकारे चैता की बहती स्वर- लहरी में अवगाहे | नयनन्नयन में धँसती जाती कोपलों की अरुणाई | तरुण कुलदेवी की बाँह बँधे सपता के डोरे बनजारे की बाट रोकते எRR नाहक धूम मची विप्लव की যাঁব-যাঁব সী वात्याचक्र जिधर उन्मद गजनसा मुँह मोड़े | छीन लिया सर्वस्व नीम ने टेकर बौरा्ई। TTF - ShareChat