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#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana
satnam waheguru ji - हम मूरख मुगध सरणागती मिलु  गोविंद रंगा राम राजे।l गुरि पूरै हरि पाइआ हरि भगति इक मंगा Il प्रभु! मैं स्वभाव से अज्ञानी और मूर्ख हूँ। मैं आपकी शरण मै तेरा में आया हूँ। कृपा करके मुझे अपने प्रेम के रंग में रंग भिखारी अर्थ बुद्धि लीजिए। यहां " मूरख" शब्दका की कमी नहीं, बल्कि अहंकार का त्याग है।्जब मनुष्य दुनिया की जिओ चालाकियों और स्वार्थ भरे रिश्तों से थक जाता है॰ तब वह यह स्वीकार करता है कि उसकी अपनी चतुराई काम नहीं   पहाडा आई। पूर्ण गुरु की शिक्षाओं पर चलकर ही परमात्मा की বাল प्राप्ति होती है। उस प्रभु से केवल एक ही दान मांगो उनकी बाबा सच्ची भक्ति। जिसे दुनिया मूरख समझकर दूरी बना लेती है। वह ईश्वर की नजर में सबसे प्रिय है यदि उसके हृदय में তী सत्य और शरणागति का भाव है। मनुष्य जब भी परमात्मा से केवल उनकी भक्ति मांगते हैं तो संसार का खालीपन अपने आप ईश्वरीय प्रेम से भर जाता है। हम मूरख मुगध सरणागती मिलु  गोविंद रंगा राम राजे।l गुरि पूरै हरि पाइआ हरि भगति इक मंगा Il प्रभु! मैं स्वभाव से अज्ञानी और मूर्ख हूँ। मैं आपकी शरण मै तेरा में आया हूँ। कृपा करके मुझे अपने प्रेम के रंग में रंग भिखारी अर्थ बुद्धि लीजिए। यहां " मूरख" शब्दका की कमी नहीं, बल्कि अहंकार का त्याग है।्जब मनुष्य दुनिया की जिओ चालाकियों और स्वार्थ भरे रिश्तों से थक जाता है॰ तब वह यह स्वीकार करता है कि उसकी अपनी चतुराई काम नहीं   पहाडा आई। पूर्ण गुरु की शिक्षाओं पर चलकर ही परमात्मा की प्राप्ति होती है। उस प्रभु से केवल एक ही दान मांगो उनकी बाबा सच्ची भक्ति। जिसे दुनिया मूरख समझकर दूरी बना लेती है। वह ईश्वर की नजर में सबसे प्रिय है यदि उसके हृदय में তী सत्य और शरणागति का भाव है। मनुष्य जब भी परमात्मा से केवल उनकी भक्ति मांगते हैं तो संसार का खालीपन अपने आप ईश्वरीय प्रेम से भर जाता है। - ShareChat