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दोहा रहीम #संतो की रचनायें
संतो की रचनायें - "alar" निज कर क्रिया रहीम कहि सीधी भावी के हाथ पांसे अपने हाथ में दांव न अपने हाथ।| भावार्थः रहीम कहते हैं कि अपने हाथ में तो केवल कर्म करना ही होता है सिद्धि तो भाग्य से ही मिलती है जैसे चौपड़ खेलते समय पांसे तो अपने हाथ में रहते हैं पर दांव क्या आएगा यह अपने हाथ में नहीं होता| (ফাম) Motivational Videos Appi Want ' "alar" निज कर क्रिया रहीम कहि सीधी भावी के हाथ पांसे अपने हाथ में दांव न अपने हाथ।| भावार्थः रहीम कहते हैं कि अपने हाथ में तो केवल कर्म करना ही होता है सिद्धि तो भाग्य से ही मिलती है जैसे चौपड़ खेलते समय पांसे तो अपने हाथ में रहते हैं पर दांव क्या आएगा यह अपने हाथ में नहीं होता| (ফাম) Motivational Videos Appi Want ' - ShareChat