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#☝ मेरे विचार
☝ मेरे विचार - @RR बात कहूंगा खरीनखरी बजट के बाद देश दो खेमों में, मैं बीच में! सुरेंद्र शर्मा मे तो अपने देशवासियों से यही कहता ह कि॰ अंतरराप्ट्रीय   स्थिति 31R खराब   है।   इधर कव एव लेखक अमेरिका ने टेरिफ घटाकर १८% किया है और जो चीज महंगी हो गई 6 उसका एक दिन surendershurmakavila hotmail com उधर रूस हमसे रूठकर बैठ गया है। अमेरिका उपवास कर लो।आत्यनिर्शर चनो। बजट क्या आया, भूचाल-्सा आ गया। मे जहां तो शहंशाह है। एक झटके में ही ५०% के टैरिफ रहता हू॰ बाइं तरफ वाले घर में भाजपाई रहते पड़ोसियों के बीच फंसा हुआ हूं। हंसकर घर को १८% कर दिया। किसी दिन दिमाग फिर घूम हें और दाएं तरफ वाले घर में कांग्रेसो रहते हे। से बाहर निकलता हूं तो कांग्रेसी भाई मिल जाते गया तो इसे फिर पांच सो प्रतिशत कर देगा। हैं।वे कहते हें, शर्मा जी, कैसे कवि हो? देश आजादी के बाद से बजट की यहो हालत अमेरिका पूरे संसार का एकमात्र गिरगिट देश है। होती हे। सत्तावाले जश्न मनाते हे और विपक्षी पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं और आप हंस इतनी तेजी स रंग बदलता हे कि गिरगिट के भी पीटते हें। मेरी पत्नी कांग्रेसी पड़ोसियों से চ মা?' তানী रंग उड़ जाएं। 4 T1 मिलकर आड। उन्हांने उसे बताया कि बजट के उनकी लानत सुनकर मैं अपना मुंह लटका अपने देशवासियों से यही कहता हूं कारण महंगाई बढ गई है। पत्नी ने आकर मुझसे लेता हूं। मुंह लटकाते ही भाजपाई भाई मिल जाते कि॰जो चीज महंगो हो ग्ई है, उसका एक दिन हैं। वे डांटते हुए कहते हैं हमें तो शुरू से ही कि तुम मुझे जो घरखर्चा देते हो, उसे अब उपवास कर लो। गरीब अलग रो रहे हें। उनका कहा चढ़ाना पड़ेगा। मेने उससे कहा कि मैं अभी-अभी शक था कि आप हमारे कभी नहों रहे। कहना हे कि ज्यादा बच्चे इसलिए पैदा कर रहे बाएं वाले पड़ोसियों से मिलकर आया हूं। उन्होंने कभी-कभी सोचता हूं कि घर बदल लूंI थे ताकि उन्हें प्रति व्यवित के हिसाब से मिलने बताया हे कि भाभी जी का घर खर्च घटा दो। लेकिन घर बदलने से मेरी दयनीय स्थिति नहों सस्ता राशन ज्यादा मिल सके। अमीर की মালা मेरी पत्नो झल्लाकर बोली, मैं तो वहीं अपनी मुसीबतें हें। मेरी सलाह है कि आराम से सुधर सकती, क्योंकि मेरे परिवार में ही आधे जहां जाने से मुझे फायदा होगा। ' चाहते हो तो चुप रहो, कुछ எ5்ரி जिंदगी बसर करना लोग बजट को सरकार का मास्टर स्ट्रोक बताते मेरी समझ में नहीं आ रहा है कि॰मैं इस हैं ओर आधे इसे जनविरोधी बजट बताते हें। न कहो। सब कुछ सहो और जेही विधि राखे फिर सोचता हूं कि देश बदल लूंI लेकिन सत्ता, तेही विधि रहिए। बजट को प्रशंसा करू या आलोचना। मैं दो @RR बात कहूंगा खरीनखरी बजट के बाद देश दो खेमों में, मैं बीच में! सुरेंद्र शर्मा मे तो अपने देशवासियों से यही कहता ह कि॰ अंतरराप्ट्रीय   स्थिति 31R खराब   है।   इधर कव एव लेखक अमेरिका ने टेरिफ घटाकर १८% किया है और जो चीज महंगी हो गई 6 उसका एक दिन surendershurmakavila hotmail com उधर रूस हमसे रूठकर बैठ गया है। अमेरिका उपवास कर लो।आत्यनिर्शर चनो। बजट क्या आया, भूचाल-्सा आ गया। मे जहां तो शहंशाह है। एक झटके में ही ५०% के टैरिफ रहता हू॰ बाइं तरफ वाले घर में भाजपाई रहते पड़ोसियों के बीच फंसा हुआ हूं। हंसकर घर को १८% कर दिया। किसी दिन दिमाग फिर घूम हें और दाएं तरफ वाले घर में कांग्रेसो रहते हे। से बाहर निकलता हूं तो कांग्रेसी भाई मिल जाते गया तो इसे फिर पांच सो प्रतिशत कर देगा। हैं।वे कहते हें, शर्मा जी, कैसे कवि हो? देश आजादी के बाद से बजट की यहो हालत अमेरिका पूरे संसार का एकमात्र गिरगिट देश है। होती हे। सत्तावाले जश्न मनाते हे और विपक्षी पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं और आप हंस इतनी तेजी स रंग बदलता हे कि गिरगिट के भी पीटते हें। मेरी पत्नी कांग्रेसी पड़ोसियों से চ মা?' তানী रंग उड़ जाएं। 4 T1 मिलकर आड। उन्हांने उसे बताया कि बजट के उनकी लानत सुनकर मैं अपना मुंह लटका अपने देशवासियों से यही कहता हूं कारण महंगाई बढ गई है। पत्नी ने आकर मुझसे लेता हूं। मुंह लटकाते ही भाजपाई भाई मिल जाते कि॰जो चीज महंगो हो ग्ई है, उसका एक दिन हैं। वे डांटते हुए कहते हैं हमें तो शुरू से ही कि तुम मुझे जो घरखर्चा देते हो, उसे अब उपवास कर लो। गरीब अलग रो रहे हें। उनका कहा चढ़ाना पड़ेगा। मेने उससे कहा कि मैं अभी-अभी शक था कि आप हमारे कभी नहों रहे। कहना हे कि ज्यादा बच्चे इसलिए पैदा कर रहे बाएं वाले पड़ोसियों से मिलकर आया हूं। उन्होंने कभी-कभी सोचता हूं कि घर बदल लूंI थे ताकि उन्हें प्रति व्यवित के हिसाब से मिलने बताया हे कि भाभी जी का घर खर्च घटा दो। लेकिन घर बदलने से मेरी दयनीय स्थिति नहों सस्ता राशन ज्यादा मिल सके। अमीर की মালা मेरी पत्नो झल्लाकर बोली, मैं तो वहीं अपनी मुसीबतें हें। मेरी सलाह है कि आराम से सुधर सकती, क्योंकि मेरे परिवार में ही आधे जहां जाने से मुझे फायदा होगा। ' चाहते हो तो चुप रहो, कुछ எ5்ரி जिंदगी बसर करना लोग बजट को सरकार का मास्टर स्ट्रोक बताते मेरी समझ में नहीं आ रहा है कि॰मैं इस हैं ओर आधे इसे जनविरोधी बजट बताते हें। न कहो। सब कुछ सहो और जेही विधि राखे फिर सोचता हूं कि देश बदल लूंI लेकिन सत्ता, तेही विधि रहिए। बजट को प्रशंसा करू या आलोचना। मैं दो - ShareChat