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महा नन्दा नवमी महानंदा नवमी एक शुभ हिंदू त्योहार है जो 'माघ', 'भाद्रपद' और 'मार्गशीर्ष' के महीनों के दौरान 'शुक्ल पक्ष' (चंद्रमा के उज्ज्वल पखवाड़े की अवधि) के 'नवमी' (9 वें दिन) को मनाया जाता है। पारंपरिक हिंदू कैलेंडर। यह तिथि ग्रेगोरियन कैलेंडर में क्रमशः जनवरी-फरवरी, अगस्त-सितंबर और दिसंबर के महीनों से मेल खाती है। इसके अलावा, महानंदा नवमी कुछ अन्य हिंदू चंद्र महीनों के दौरान भी मनाई जाती है। इस दिन मुख्य अनुष्ठान में गंगा और यमुना जैसी पवित्र नदियों में स्नान करके शुद्धिकरण शामिल है। हिंदू भक्त इस 'शुक्ल पक्ष नवमी' पर देवी दुर्गा की पूजा करते हैं। महानंदा नवमी जिसे 'ताला नवमी' भी कहा जाता है, भारत के उत्तरी और पूर्वी राज्यों, विशेष रूप से उड़ीसा और पश्चिम बंगाल में अत्यधिक उत्साह और उत्साह के साथ मनाया जाता है। महानंदा नवमी का त्योहार हिंदू भक्तों के लिए बहुत धार्मिक महत्व रखता है। इस दिन की पूजा की मुख्य देवता देवी दुर्गा हैं। हिंदू किंवदंतियों के अनुसार, देवी दुर्गा शक्ति और ऊर्जा की प्रतीक हैं। नंदा देवी की अराधना प्राचीन काल से ही होती चली आ रही है. नंदा को नवदुर्गाओं में से एक बताया गया है. भाद्रपद कृष्ण पक्ष की नवमी तथा शुक्ल पक्ष की नवमी को नन्दा कहा जाता है. साल में तीन अवधियों में दुर्गा पूजा की जाती है. भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की नवमी महानंदानवमी के रुप में जानी जाती है. अष्टमी को उपवास रखा जाता है तथा नवमी के दिन भगवान शिव और देवी नंदा की पूजा की जाती है. जागरण किया जाता है तथा भोग लगाया जाता है, नवमी के दिन चण्डिका पूजन से नंदानवमी व्रत संपूर्ण होता है.धर्म ग्रंथों एवं लोक कथाओं मे नन्दा देवी की के बखान का वर्णन किया गया है. नन्दा देवी की महिमा का वर्णन का प्रमाण धार्मिक ग्रंथों व पुराणों में मिलता है. मां भगवती की छ: अंगभूता देवियों में नंदा देवी को स्थान प्राप्त है. विष्णु पुराण अनुसार नौ दुर्गाओं का उल्लेख मिलता है जिनमें देवी महालक्ष्मी, हरसिद्धी, क्षेमकरी, शिवदूती, महाटूँडा, भ्रामरी, चंद्रमंडला, रेवती एवं नन्दा देवी प्रमुख हैं. इसी के साथ शिवपुराण में शक्ति रुप में नंदा देवी हिमालय में स्थपित व पूजित हैं. नंदादेवी देवी को शक्ति रूप व सौंदर्य से युक्त देवी मना जाता है. नवमी के दिन देवी मां नन्दा देवी की उपासना मुख्य रुप से कि जाती है. नंदा नवमी के उपलक्ष्य पर अनेक स्थानों पर नंदा देवी के सम्मान में मेलों का आयोजन किया जाता है. नंदाष्टमी को कोट की माई का मेला और नैतीताल में नंदादेवी मेला प्रमुख हैं जुडे हुए हैं. अल्मोड़ा नगर में स्थित ऐतिहासिकता नंदादेवी मंदिर में हर साल भाद्र मास की शुक्ल पक्ष की अष्टमी को मेला लगता है जो बहुत ही भव्य एवं रौनक से भरा होता है यहां धार्मिक मान्यताओं की सुंदर झलक दिखती है. #शुभ कामनाएँ 🙏
शुभ कामनाएँ 🙏 - २७ जनवरी २०२६ मंगलवार G महानन्दा नवमी हार्दिक शुभकांमनाएं Motivational Videos App Want २७ जनवरी २०२६ मंगलवार G महानन्दा नवमी हार्दिक शुभकांमनाएं Motivational Videos App Want - ShareChat