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#✍गुलजारांचे साहित्य
✍गुलजारांचे साहित्य - ज़िंदगी भर सुख कमाकर घर में लाने की कोशिश करते रहे , पता ही ना चला की कब खिड़कियों से उम्र निकल गयी !! ज़िंदगी भर सुख कमाकर घर में लाने की कोशिश करते रहे , पता ही ना चला की कब खिड़कियों से उम्र निकल गयी !! - ShareChat