#❤️जीवन की सीख
🙏|| श्री हरि: ||🙏
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‼️अपना जीवन दूसरों के हित के लिये हो‼️
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🌍संसार में कोई भी चीज हो उससे शिक्षा लेनी चाहिये | वर्तमान में हममे बुरी आदतें हैं, बुरा भाव है, उसे हटाना चाहिये | जो चीज जिसमे अच्छी हो उससे ग्रहण करनी चाहिये | अच्छे पुरुषों की जीवनी, दर्शन, गुणों से हमे शिक्षा मिलती है, वे तो शिक्षालय ही है |
चद्दर से हमे शिक्षा मिल सकती है | जिसकी चद्दर है वह चाहे सिर पर रखे, चाहे पैरों में रखे वह कुछ नहीं कहती | चाहे फाडो, आग में डाल दो कुछ नहीं बोलती, अपने-आपको अपने मालिक को सौंप रखा है | यह शिक्षा दे रही है कि जैसे मैं अपने स्वामी की शरण हूँ, यही शरण का भाव है | जहाँ तक अपना अधिकार है, वह सब कुछ भगवान् के अर्पण कर देना, भगवान् के काम में ही लगा देना है |🌍
🤹कठपुतली ने अपने-आपको सूत्रधार के अर्पण कर रखा है | हमे भी अपने आपको परमात्मा के अर्पण कर देना चाहिये | वे जो कुछ करें, उनकी सारी क्रिया में मौन रहना चाहिये | उनके नाम-गुणों का कीर्तन, भजन, स्मरण, ध्यान भी करना चाहिये | कठपुतली यह नहीं कर सकती | हमे यह विशेष करना चाहिये | गीता में भगवान् ने बताया है –🤹
🛐सब कर्मों को मन से मुझ में अर्पण करके तथा समबुध्दिरूप योग को अवलम्बन करके मेरे परायण और निरन्तर मुझमे चित्त वाला हो (गीता १८/५७) |🛐
✍️इसी प्रकार हमे अपने शरीर की तरफ देखकर निर्णय करना चाहिये कि यह किस काम की चीज है | दुनिया में ऐसा कोई काम नहीं जो मनुष्य नहीं कर सके | चादर तो मनुष्य की ही सेवा कर सकती है | मनुष्य, देवता, भूत, पितर, यक्ष, राक्षस, वृक्ष. पशु आदि दुनिया में जितने प्राणी हैं, सबकी मनुष्य सेवा कर सकता है | मनुष्य के अलावा कोई प्राणी ऐसा नहीं कर सकता | मनुष्य-शरीर तुम्हारे हाथ में है, यह जब तक तुम्हारे पास है सबकी सेवा करो, सबकी सेवा करना ही महायज्ञ है |✍️
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