उनकी 'आग' का अर्थ है,विवेक की अग्नि.. जो शून्य और अनंत है, 'शिव' शब्द का अर्थ ही है वह जो नहीं है ,वे शून्यता के प्रतीक हैं। महाशिवरात्रि की रात इसी 'शून्यता' में उतरने की रात है। शिव
बाबा एक क्रांतिकारी है जो संसार के 'विष' (कष्ट, अपमान, कड़वाहट) को पीकर उसे अमृ
#Eek Tu Hi Guru Ji त' करुणा और शांति में बदल देते है। वे हमें सिखाते हैं कि बाहर की आग से जलने के बजाय, अपने भीतर की ऊर्जा को जगाओ। यदि आप मिटने को तैयार हैं, तो शिव आपके भीतर के 'हलाहल' को भी आत्मज्ञान में बदल सकते हैं। शिव केवल पुरुषत्व नहीं, वे स्त्री और पुरुष (शिव और शक्ति) के मिलन का पूर्ण रूप हैं। एक 'पैगंबर' के रूप में वे बताते हैं कि जीवन केवल तर्क से नहीं, बल्कि प्रेम और भाव के संतुलन से चलता है। शिव वह आग हैं जो जलाती तो है, लेकिन उस राख से जो सोना निकलता है, वह कभी मलिन नहीं होता..!! ॐ नमःशिवाय शिवा शिव जी सदा सहाय।।


