विकट संकष्टी चतुर्थी व्रत
हिंदू धर्म में वैशाख महीने का विशेष महत्व है और धार्मिक कार्यों के लिए इस माह को काफी पवित्र माना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को विकट संकष्टी चतुर्थी व्रत रखा जाएगा। इस दिन भगवान गणेश के एकदंत रूप की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार विकट संकष्टी चतुर्थी पर भगवान गणेश की पूजा करने से जातक के सभी दुख दूर हो जाते हैं और यश की प्राप्ति होती है। इसके अलावा विकट संकष्टी चतुर्थी पर चंद्र देव की भी पूजा की जाती है। विकट संकष्टी चतुर्थी व्रत में भगवान गणेश और माता चौथ की आराधना की जाती है। इस व्रत को करने से संतान संबंधी सभी दुख दूर होते हैं और संतान का भविष्य उज्जवल बनता है। वहीं वैवाहिक जीवन में तनाव कम होता है और कारोबार में आ रही समस्याएं भी दूर हो जाती है। विकट संकष्टी चतुर्थी के दिन व्रत रखने से जातक को बल, बुद्धि, आरोग्य और सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है।
पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार सभी देवी-देवताओं के ऊपर भारी संकट आ गया. जब वह खुद से उस संकट का समाधान नहीं निकाल पाए तो भगवान शिव के पास मदद मांगने के लिए गए. भगवान शिव ने गणेश जी और कार्तिकेय से संकट का समाधान करने के लिए कहा तो दोनों भाइयों ने कहा कि वे आसानी से इसका समाधान कर लेंगे. इस प्रकार शिवजी दुविधा में आ गए. उन्होंने कहा कि इस पृथ्वी का चक्कर लगाकर जो सबसे पहले मेरे पास आएगा वही समाधान करने जाएगा.
भगवान कार्तिकेय बिना किसी देर किए अपने वाहन मोर पर सवार होकर पृथ्वी की परिक्रमा करने के लिए निकल गए. वहीं गणेश जी के पास मूषक की सवारी थी. ऐसे में मोर की तुलना में मूषक का जल्दी परिक्रमा करना संभव नहीं था. तब उन्होंने बड़ी चतुराई से पृथ्वी का चक्कर ना लगाकर अपने स्थान पर खड़े होकर माता पार्वती और भगवान शिव की 7 परिक्रमा की. जब महादेव ने गणेश जी से पूछा कि उन्होंने ऐसा क्यों किया तो इस पर गणेश जी बोले माता पिता के चरणों में ही पूरा संसार होता है।
#शुभ कामनाएँ 🙏


