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#जय श्री #जय श्री राम 🤹जामवंत: वो योद्धा जिनकी जवानी का अंदाज़ा भी असंभव है!🤹 📕रामायण में कई महायोद्धा हैं, लेकिन एक नाम ऐसा है जो शांत है, गूढ़ है और अकल्पनीय शक्ति का प्रतीक है ,जामवंत।। उनके बारे में ग्रंथों में ज्यादा विस्तार नहीं मिलता, लेकिन जो थोड़ा-सा मिलता है… वही कल्पना से परे है। सतयुग से आए थे जामवंत। जामवंत कोई साधारण वानर नहीं थे उनकी उत्पत्ति सीधे ब्रह्माजी से मानी जाती है।📕 🎇सतयुग के योद्धाओं की शक्ति की तुलना किसी और युग से नहीं की जा सकती। जिसका जन्म स्वयं ब्रह्मा से हो… उसकी ताकत का अनुमान कैसे लगाया जाए....?🎇 ‼️रावण और मेघनाद पाद प्रहार से मूर्छित!‼️ 🛐रामचरितमानस में उल्लेख मिलता है कि जामवंत ने रावण और मेघनाद दोनों को अपने पाद प्रहार (पैर के आघात) से मूर्छित कर दिया था। ज़रा सोचिए — रावण… जिसे देवता भी नहीं हरा पाए । मेघनाद… जिसने इंद्र को बंदी बना लिया था और जामवंत ने उन्हें पैरों से धराशायी कर दिया वो भी वृद्धावस्था में, तो युवावस्था में उनका बल कैसा रहा होगा..? समुद्र मंथन में अकेले घुमा दिया मंदराचल! जब देवता और दैत्य मिलकर समुद्र मंथन कर रहे थे, तब मंदराचल पर्वत को घुमाना बेहद कठिन हो रहा था। लेकिन जामवंत ने अपनी जवानी के जोश में अकेले ही मंदराचल को घुमा दिया! क्या आप कल्पना कर सकते हैं उस शक्ति की… जो एक पर्वत को अकेले घुमा दे....? वामन अवतार और सात परिक्रमा – सिर्फ 7 पल में! जब भगवान ने विराट रूप लेकर स्वर्ग को नापा, और पृथ्वी को नापने के लिए पैर उठाया तभी जामवंत ने केवल 7 पल में पृथ्वी की 7 परिक्रमा कर ली। एक पल लगभग 24 सेकंड का माना जाता है। यानी कुछ ही मिनटों में पृथ्वी की सात परिक्रमा! यह गति शब्दों से परे है। 6 मन्वंतर की आयु… फिर भी 90 योजन छलांग! जब सीता माता की खोज के लिए समुद्र लांघने की बात हुई, तब जामवंत बोले:“मैं तो बहुत वृद्ध हो गया हूँ, फिर भी 90 योजन तक जा सकता हूँ।” उनकी आयु उस समय 6 मन्वंतर बताई जाती है। एक मन्वंतर = करोड़ों वर्षों का काल! इतनी आयु के बाद भी 90 योजन… तो युवावस्था में क्या वे पूरे ब्रह्मांड को नाप सकते थे?🛐 🧍द्वापर में 28 दिन तक युद्ध!🧍 ❣️द्वापर युग में उनका युद्ध स्वयं श्रीकृष्ण से हुआ।और उन्हें परास्त करने के लिए श्रीकृष्ण को 28 दिन तक युद्ध करना पड़ा। स्वयं भगवान को जिसे हराने में 28 दिन लग जाएँ…उसकी शक्ति की सीमा क्या होगी?❣️ 🌍मेरु का श्राप🌍 🧘जब अंगद ने पूछा कि आपका बल क्षीण कैसे हुआ? तब जामवंत ने बताया पृथ्वी की परिक्रमा करते समय उनका नाखून महामेरु पर्वत से टकरा गया और उसका शिखर खंडित हो गया। मेरु ने इसे अपमान समझकर उन्हें श्राप दिया“तुम सदा वृद्ध रहोगे, और तुम्हारा बल क्षीण हो जाएगा।” सबसे बड़ी बात – शक्ति थी, पर अहंकार नहीं। इतनी अद्भुत शक्ति…इतनी असंभव गति…इतनी प्राचीन आयु…फिर भी जामवंत में रत्ती भर भी घमंड नहीं था। वे स्वयं समुद्र नहीं लांघे, बल्कि हनुमान को उनकी शक्ति का स्मरण कराया। यही सच्चा महायोद्धा होता है जो स्वयं महान हो, पर दूसरों को महान बनाए।🧘 🙏जामवंत हमें सिखाते हैं — शक्ति का शोर नहीं होता। वह मौन रहती है… और समय आने पर इतिहास रच देती है।🙏 🛐जय जय श्रीराम 🛐
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