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#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana
satnam waheguru ji - { गइआ प्रभि आपि गवाइआ[| नीद पई सुख सहज घरु आइआ[ মী নহা अध्यात्म में सबसे बड़ा रोग हउमै अहंकार, चिंताऔर हे भाई। मानसिक अशांति को माना गया है। जब इंसान अपनी चतुराई भिखारी में खुद ' को समर्पित कर देता छोड़कर परमात्मा के चरणों है, तो परमात्मा उसके मानसिक बोझ और विकारों को जड़ से 3 मिटा देता है। जब मनुष्य के मन से दुविधा और डर निकल जाता है, तो उसकी आत्मा एक ऐसे विश्राम में चली जाती है जहाँ कोई हलचल नहीं होती। जैसे एक बच्चा माँ की गोद में पूरी तरह अपने পঙ্াভা आप को सुरक्षित महसूस कर सो जाता है, वैसे ही भक्त प्रभु की शरण में निश्चिंत हो जाता है।सहज' वह अवस्था है, जहाँ मनुष्य वाले में टूटता ' में बहुत ' ज्यादा उछलता है और न दुख है।जब Sq परमात्मा की कृपा होती है, तो मनुष्य के भीतर शांति का संतुलन बाबा आ जाता है, जिसे सहज घर' गुरबाणी मे कहा गया है। अगर हम अपनी समस्याओं को उस मालिक के चरणों में अर्पण कर दें, तो वह न केवल हमारे कष्टों को हर लेता है, बल्कि हमारे भीतर एक स्थायी शांति और आनंद भर देता है। { गइआ प्रभि आपि गवाइआ[| नीद पई सुख सहज घरु आइआ[ মী নহা अध्यात्म में सबसे बड़ा रोग हउमै अहंकार, चिंताऔर हे भाई। मानसिक अशांति को माना गया है। जब इंसान अपनी चतुराई भिखारी में खुद ' को समर्पित कर देता छोड़कर परमात्मा के चरणों है, तो परमात्मा उसके मानसिक बोझ और विकारों को जड़ से 3 मिटा देता है। जब मनुष्य के मन से दुविधा और डर निकल जाता है, तो उसकी आत्मा एक ऐसे विश्राम में चली जाती है जहाँ कोई हलचल नहीं होती। जैसे एक बच्चा माँ की गोद में पूरी तरह अपने পঙ্াভা आप को सुरक्षित महसूस कर सो जाता है, वैसे ही भक्त प्रभु की शरण में निश्चिंत हो जाता है।सहज' वह अवस्था है, जहाँ मनुष्य वाले में टूटता ' में बहुत ' ज्यादा उछलता है और न दुख है।जब Sq परमात्मा की कृपा होती है, तो मनुष्य के भीतर शांति का संतुलन बाबा आ जाता है, जिसे सहज घर' गुरबाणी मे कहा गया है। अगर हम अपनी समस्याओं को उस मालिक के चरणों में अर्पण कर दें, तो वह न केवल हमारे कष्टों को हर लेता है, बल्कि हमारे भीतर एक स्थायी शांति और आनंद भर देता है। - ShareChat