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#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana
satnam waheguru ji - ক্িত্তু] त्रिहु ঘুতন ভরপ্স ফু্ভ্তুমইত্রমইতু होवै [35 भिनगा तिसहि बरुझाए नानका " सुप्रसंनत Tor हे भाई! ईश्वरकिसी मूर्ति यातस्वीर्तकसीमित  नहीं है। वह हर जगह हैे क्योंकि उसका कोई एक लगे रंग यारूप नहीं है। वह पूरी सृष्टि में समाया हुआ है। संसार में जो कुछ भी हम देखते हैं वह तीन गुणों लालच क्रोध औरशांति के अधीन है, तेरा सब बंधनों से मुक्त है। लेकिन परमात्मा इन बाबा नानक जी कहते हे! ईश्वर के इस निराकार भाणा स्वरूप को वही समझ पाता है, जिस पर वह स्वयं प्रसन्न (कृपालु होता है। परमात्मा को मनुष्य अपनी चतुराई से नहीं पा सकता। उसे समझने के Sle या 31R' ಞ' কী থিমা কী उसकी नदर@कृपा) आवश्यकता होती है। ক্িত্তু] त्रिहु ঘুতন ভরপ্স ফু্ভ্তুমইত্রমইতু होवै [35 भिनगा तिसहि बरुझाए नानका " सुप्रसंनत Tor हे भाई! ईश्वरकिसी मूर्ति यातस्वीर्तकसीमित  नहीं है। वह हर जगह हैे क्योंकि उसका कोई एक लगे रंग यारूप नहीं है। वह पूरी सृष्टि में समाया हुआ है। संसार में जो कुछ भी हम देखते हैं वह तीन गुणों लालच क्रोध औरशांति के अधीन है, तेरा सब बंधनों से मुक्त है। लेकिन परमात्मा इन बाबा नानक जी कहते हे! ईश्वर के इस निराकार भाणा स्वरूप को वही समझ पाता है, जिस पर वह स्वयं प्रसन्न (कृपालु होता है। परमात्मा को मनुष्य अपनी चतुराई से नहीं पा सकता। उसे समझने के Sle या 31R' ಞ' কী থিমা কী उसकी नदर@कृपा) आवश्यकता होती है। - ShareChat