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☝ मेरे विचार - राजस्थान देनिक வழ5 जयपर रविवार 5 अपैल २०२६ तालछापर वेटलैंड से अपने मूल स्थानों की ओर लौटने लगे प्रवासी पक्षी फोटी स्टौरी संड तालछापर अभयारण्य व जसवंतगढ़ क्षेत्र में बने मिनी तालछापर वेटलैेड रूस जैसे ठंडे देशों से आए SITIG () इन परिंदों ने पिछले चार माह से यहां डेरा जमा रखा था। में सर्दियों के दौरान प्रवास पर आए विदेशी पक्षी अब गर्मी की शुरुआत के साथ अपने इहुचा 3 जसवंत गेढ़ वेटलैड विकसित होने के बाद पहली बार बड़ी संख्या मे प्रवासी पृक्षी  इस वष मूल स्थानों की ओर लौटने लगे है। कुरजां सहित अनेक तरह के विदेशी पक्षी करीब  अनुमान के अनुसार दस हजार से अधिक बिदेशी व जलीय पक्षियों ने यहां सर्दी  आठ हजार किलोमीटर को लंबी उड़ानभर यहां आए है। साइबेरिया , कजाकिस्तान व जो अब लौट रहे ह।  बताई राजस्थान देनिक வழ5 जयपर रविवार 5 अपैल २०२६ तालछापर वेटलैंड से अपने मूल स्थानों की ओर लौटने लगे प्रवासी पक्षी फोटी स्टौरी संड तालछापर अभयारण्य व जसवंतगढ़ क्षेत्र में बने मिनी तालछापर वेटलैेड रूस जैसे ठंडे देशों से आए SITIG () इन परिंदों ने पिछले चार माह से यहां डेरा जमा रखा था। में सर्दियों के दौरान प्रवास पर आए विदेशी पक्षी अब गर्मी की शुरुआत के साथ अपने इहुचा 3 जसवंत गेढ़ वेटलैड विकसित होने के बाद पहली बार बड़ी संख्या मे प्रवासी पृक्षी  इस वष मूल स्थानों की ओर लौटने लगे है। कुरजां सहित अनेक तरह के विदेशी पक्षी करीब  अनुमान के अनुसार दस हजार से अधिक बिदेशी व जलीय पक्षियों ने यहां सर्दी  आठ हजार किलोमीटर को लंबी उड़ानभर यहां आए है। साइबेरिया , कजाकिस्तान व जो अब लौट रहे ह।  बताई - ShareChat