ShareChat
click to see wallet page
search
#BREAKING NEWS #indoriatimes #news #🔴 क्राइम अपडेट #samachar #editorial #Nagar Parishad #kotputli
BREAKING NEWS - Editorial सुशासन की पहचान कोटपूतली - बहरोड़़ की यूडी टैक्स वसूली की नगर परिषद स्थिति सिर्फ आंकड़ों की नाकामी नहीं, बल्कि प्रशासनिक कमजोरी ক লঃয का खुला प्रमाण है। वित्तीय वर्ष २०२५-२६ में 3 करोड़ रुपये के सामने अब तक केवल १.११ करोड़ रुपये की वसूली यह सा़फ दर्शाती है कि परिषद न तो अपनी प्राथमिकताएं तय कर पाई और न ही इच्छाशक्ति दिखा सकी । के आंकड़े कोटपूतली- यूडी टैक्स নমুলী बहरोड़ नगर परिषद की प्रशासनिक सच्चाई उजागर कर रहे हैं। 3 करोड़ के लक्ष्य के सामने सिर्फ १ ९१ करोड़ की वसूली और १० बड़ी संपत्तियों पर १.३० करोड़ का बकाया यह साबित करता है कि समस्या डॉ. राकेश থIম संसाधनों की नहीं , इच्छाशक्ति की है। छोटे करदाता समय पर भुगतान कर रहे हैं, लेकिन करोडों दबाए बैठे बडे बकायेदार अब तक कार्रवाई से बाहर हैं बार-बार नोटिस और अंतिम अवसर की चेतावनियां तब सवालों के घेरे में आती हैं जब सीजिंग और जैसी ठोस कार्रवाई नजर नहीं आती | कुर्की  सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि सिर्फ १० बड़ी संपत्तियों पर १.३० करोड़ रुपये का बकाया लंबे समय से अटका हुआ है। यह लाजमी है कि॰ छोटे दुकानदार और सवाल TMN उठना जव गृहस्वामी समय पर टैक्स जमा कर रहे हैँ, तब करोड़ों दबाए बैठे लोग अब तक कार्रवाई से बाहर क्यों हैं ? नगर परिषद यह तर्क दे सकती है कि नोटिस दिए गए, मौके पर टीमें भेजी गईं, अंतिम अवसर दिया जा रहा है। लेकिन प्रशासन का काम सिर्फ चेतावनी देना नहीं , कार्रवाई करना होता है। अगर बार- बार नोटिस के बावजूद बकाया जमा नहीं हो रहा, तो इसका अर्थ सा़फ है-या तो प्रशासन दबाव में है,या फिर बड़े बकायेदारों को संरक्षण प्राप्त है। यह स्थिति शहर के विकास को सीधे प्रभावित करती है। सड़कें , नालियां, स्ट्रीट लाइट, पेयजल और स्वच्छता जैसे मूलभूत कार्य यूडी  टैक्स की राशि पर ही निर्भर होते हैं । जब वही राशि वसूल नहीं होगी, तो विकास कार्य ठप होना तय है और इसकी कीमत आम नागरिक चुकाता है अध्यक्ष और आयुक्त की भूमिका ऐसे समय में नगर परिषद निर्णायक होनी चाहिए थी। नेतृत्व का अर्थ है कठिन फैसले लेना, न कि फाइलों को तारीखों के बोझ तले दबाना १० बडी संपत्तियों पर होना इस बात का संकेत है कि प्रशासनिक नियंत्रण सख्त कार्रवाई कमजोर पडा है। गौरतलब बात यह है कि आगामी २८ जनवरी की समय-्सीमा तय की गई है। यह तारीख केवल कैलेंडर पर दर्ज एक और दिन बनकर रह जाएगी या शहर की आवश्यकता के अनुरूप अपेक्षाओं पर और कानूनी खरी उतरेगी है।यदि इसके बाद भी सीजिंग, कुर्की कार्रवाई नहीं होती, तो यह सा़फ है कि नगर परिषद बड़े बकायेदारों के सामने नतमस्तक है यह तो स्पष्ट है कि कर व्यवस्था का सम्मान डर से नहीं, निष्पक्ष कार्रवाई से होता है। जब तक बड़े और छोटे करदाताओं के लिए एक ही मापदंड नहीं होगा, तब तक यह व्यवस्था भरोसे के लायक नहीं बन अब निर्णय नगर परिषद के हाथ में है या तो प्रशासन मजबूत सकती बने, या फिर बडे बकायेदारों की कमजोरी का पर्याय बनकर रह जाए ही सुशासन की पहचान है। निष्पक्ष कर वसूली Editorial सुशासन की पहचान कोटपूतली - बहरोड़़ की यूडी टैक्स वसूली की नगर परिषद स्थिति सिर्फ आंकड़ों की नाकामी नहीं, बल्कि प्रशासनिक कमजोरी ক লঃয का खुला प्रमाण है। वित्तीय वर्ष २०२५-२६ में 3 करोड़ रुपये के सामने अब तक केवल १.११ करोड़ रुपये की वसूली यह सा़फ दर्शाती है कि परिषद न तो अपनी प्राथमिकताएं तय कर पाई और न ही इच्छाशक्ति दिखा सकी । के आंकड़े कोटपूतली- यूडी टैक्स নমুলী बहरोड़ नगर परिषद की प्रशासनिक सच्चाई उजागर कर रहे हैं। 3 करोड़ के लक्ष्य के सामने सिर्फ १ ९१ करोड़ की वसूली और १० बड़ी संपत्तियों पर १.३० करोड़ का बकाया यह साबित करता है कि समस्या डॉ. राकेश থIম संसाधनों की नहीं , इच्छाशक्ति की है। छोटे करदाता समय पर भुगतान कर रहे हैं, लेकिन करोडों दबाए बैठे बडे बकायेदार अब तक कार्रवाई से बाहर हैं बार-बार नोटिस और अंतिम अवसर की चेतावनियां तब सवालों के घेरे में आती हैं जब सीजिंग और जैसी ठोस कार्रवाई नजर नहीं आती | कुर्की  सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि सिर्फ १० बड़ी संपत्तियों पर १.३० करोड़ रुपये का बकाया लंबे समय से अटका हुआ है। यह लाजमी है कि॰ छोटे दुकानदार और सवाल TMN उठना जव गृहस्वामी समय पर टैक्स जमा कर रहे हैँ, तब करोड़ों दबाए बैठे लोग अब तक कार्रवाई से बाहर क्यों हैं ? नगर परिषद यह तर्क दे सकती है कि नोटिस दिए गए, मौके पर टीमें भेजी गईं, अंतिम अवसर दिया जा रहा है। लेकिन प्रशासन का काम सिर्फ चेतावनी देना नहीं , कार्रवाई करना होता है। अगर बार- बार नोटिस के बावजूद बकाया जमा नहीं हो रहा, तो इसका अर्थ सा़फ है-या तो प्रशासन दबाव में है,या फिर बड़े बकायेदारों को संरक्षण प्राप्त है। यह स्थिति शहर के विकास को सीधे प्रभावित करती है। सड़कें , नालियां, स्ट्रीट लाइट, पेयजल और स्वच्छता जैसे मूलभूत कार्य यूडी  टैक्स की राशि पर ही निर्भर होते हैं । जब वही राशि वसूल नहीं होगी, तो विकास कार्य ठप होना तय है और इसकी कीमत आम नागरिक चुकाता है अध्यक्ष और आयुक्त की भूमिका ऐसे समय में नगर परिषद निर्णायक होनी चाहिए थी। नेतृत्व का अर्थ है कठिन फैसले लेना, न कि फाइलों को तारीखों के बोझ तले दबाना १० बडी संपत्तियों पर होना इस बात का संकेत है कि प्रशासनिक नियंत्रण सख्त कार्रवाई कमजोर पडा है। गौरतलब बात यह है कि आगामी २८ जनवरी की समय-्सीमा तय की गई है। यह तारीख केवल कैलेंडर पर दर्ज एक और दिन बनकर रह जाएगी या शहर की आवश्यकता के अनुरूप अपेक्षाओं पर और कानूनी खरी उतरेगी है।यदि इसके बाद भी सीजिंग, कुर्की कार्रवाई नहीं होती, तो यह सा़फ है कि नगर परिषद बड़े बकायेदारों के सामने नतमस्तक है यह तो स्पष्ट है कि कर व्यवस्था का सम्मान डर से नहीं, निष्पक्ष कार्रवाई से होता है। जब तक बड़े और छोटे करदाताओं के लिए एक ही मापदंड नहीं होगा, तब तक यह व्यवस्था भरोसे के लायक नहीं बन अब निर्णय नगर परिषद के हाथ में है या तो प्रशासन मजबूत सकती बने, या फिर बडे बकायेदारों की कमजोरी का पर्याय बनकर रह जाए ही सुशासन की पहचान है। निष्पक्ष कर वसूली - ShareChat