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#✍🏽 माझ्या लेखणीतून
✍🏽 माझ्या लेखणीतून - कभी हँसी की बारिश है तो कभी आँसुओं का समंदर ೯; ज़िन्दगी का हर एक पल किसी इम्तिहान का मंज़र है; कभी सपनों के फूल खिले हैं, तो कभी रेगिस्तान सी बंजर है; नहीं ऐ पर थकना मुसाफिर ये जिन्दगी अवसरों का समंदर है।। सुप्रभात कभी हँसी की बारिश है तो कभी आँसुओं का समंदर ೯; ज़िन्दगी का हर एक पल किसी इम्तिहान का मंज़र है; कभी सपनों के फूल खिले हैं, तो कभी रेगिस्तान सी बंजर है; नहीं ऐ पर थकना मुसाफिर ये जिन्दगी अवसरों का समंदर है।। सुप्रभात - ShareChat