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गज़ल #✒ शायरी
✒ शायरी - मुनव्वर लखनवी गज़ल ब-्दामाँ हुस्न -ए-सद -रंग   से फ़िरदौस নিকলা हम ने जिस फूल को देखा वो गुलिस्ताँ निकला बलाओं हो   गए और में असीर दाद-्तलब हश्र इक   सिलसिला -ए-्ज़ुल्फ़ ए-परेशाँ  निकला और क्या शय है ये मेराज-ए-्मोहब्बत के सिवा কী   ৪ী   কয अरमाँ   निकला T आरज़ू आप ೫ 1z9-೯-೫ೆ = मिलाया को ख़ाक मुझ और  इस पर भी मैं सर-हल्क़ा ए-्दौराँ निकला रे ये  जज़्बा -ए-ख़ुद्दार की 'মুনলপয' उफ़ नुमूद इक 'अजब शान का शा'इर ये सुख़न- दाँ निकला Motivational Vidleos /oo Want मुनव्वर लखनवी गज़ल ब-्दामाँ हुस्न -ए-सद -रंग   से फ़िरदौस নিকলা हम ने जिस फूल को देखा वो गुलिस्ताँ निकला बलाओं हो   गए और में असीर दाद-्तलब हश्र इक   सिलसिला -ए-्ज़ुल्फ़ ए-परेशाँ  निकला और क्या शय है ये मेराज-ए-्मोहब्बत के सिवा কী   ৪ী   কয अरमाँ   निकला T आरज़ू आप ೫ 1z9-೯-೫ೆ = मिलाया को ख़ाक मुझ और  इस पर भी मैं सर-हल्क़ा ए-्दौराँ निकला रे ये  जज़्बा -ए-ख़ुद्दार की 'মুনলপয' उफ़ नुमूद इक 'अजब शान का शा'इर ये सुख़न- दाँ निकला Motivational Vidleos /oo Want - ShareChat