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कभी मल्टीविटामिन खाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। आयुर्वेद में 'रस' का अर्थ केवल स्वाद नहीं, बल्कि भोजन के वे छह मौलिक गुण हैं जो हमारे शरीर, मन और दोषों (वात, पित्त, कफ) पर गहरा प्रभाव डालते हैं। यहाँ आयुर्वेद के 6 रसों (Shad Rasa) का संक्षिप्त विवरण दिया गया है: 1. मधुर (Sweet) यह पृथ्वी और जल तत्वों से बना है। यह शरीर को ऊर्जा देता है और ऊतकों (tissues) का निर्माण करता है। प्रभाव: वात और पित्त को कम करता है, कफ को बढ़ाता है। स्रोत: घी, चावल, गेहूँ, दूध, पके हुए फल, शहद। 2. अम्ल (Sour) यह पृथ्वी और अग्नि तत्वों से बना है। यह पाचन तंत्र को सक्रिय करता है और लार बनाने में मदद करता है। प्रभाव: वात को कम करता है, पित्त और कफ को बढ़ाता है। स्रोत: नींबू, दही, इमली, सिरका, खमीर वाले भोजन (Fermented food)। 3. लवण (Salty) यह जल और अग्नि तत्वों से बना है। यह शरीर में जल का संतुलन बनाए रखने और पाचन में सहायक होता है। प्रभाव: वात को कम करता है, पित्त और कफ को बढ़ाता है। स्रोत: सेंधा नमक, समुद्री नमक, समुद्री शैवाल (Seaweed)। 4. कटु (Pungent/Spicy) यह वायु और अग्नि तत्वों से बना है। यह मेटाबॉलिज्म बढ़ाता है और शरीर के रास्तों (channels) को साफ करता है। प्रभाव: कफ को कम करता है, पित्त और वात को बढ़ाता है। स्रोत: मिर्च, अदरक, काली मिर्च, लहसुन, प्याज। 5. तिक्त (Bitter) यह वायु और आकाश तत्वों से बना है। यह शरीर से विषाक्त पदार्थों (toxins) को निकालने और खून को साफ करने में सबसे प्रभावी है। प्रभाव: पित्त और कफ को कम करता है, वात को बढ़ाता है। स्रोत: नीम, करेला, हल्दी, कॉफी, हरी पत्तेदार सब्जियां। 6. कषाय (Astringent) यह वायु और पृथ्वी तत्वों से बना है। यह घाव भरने और शरीर से अतिरिक्त नमी सोखने में मदद करता है। प्रभाव: पित्त और कफ को कम करता है, वात को बढ़ाता है। स्रोत: कच्चा केला, अनार, चने, बीन्स, त्रिफला। विशेष टिप: आयुर्वेद के अनुसार, एक संतुलित भोजन वही है जिसमें ये छहों रस सही मात्रा में मौजूद हों। #DrJitenderGill #ayurveda #⚕️आरोग्य #🎓जनरल नॉलेज #😇डोकं चालवा #🩸आयुर्वेद टिप्स 🍃 #🌿आयुर्वेदा
⚕️आरोग्य - कभी मल्टीविटामिन खानेकीजरूरत नहींपड़ेगी| मिथुन,  कर्क मोन 4 तुला, वृश्चिक मध्य TTTT9TT দালুন; ঈন্ आषाढ़ , श्रावण எட अपराहकाल पूर्वाहकाल अर्धरात्रिन अर्थात् aক, মাম कष्टों स्वस्वाधिक्यमृतावृतौ  ||4৩ || नित्यं   सर्वरसाभ्यासः वे प्रायः ऋतुओं में प्रतिदिन सभनी ( छहों ) रसों का सेवन करेना चाहिए तथा किप आव्विन ೫ ಳ -निर्देश   सभी  रससेवन - निर्देश दिया गया है, उस-उस ऋतु में उस-उस रस का में जिन-जिन रसों के सेवन का विशेष 6 Td सेवन करना चाहिए।। ५७ ।। समर्थन महर्षि चरक इस प्रकार कहा है॰ इसका नित्यं सर्वरसाभ्यासः जो वाग्भट ने ২4/Y০ ) সথনি वक्तव्य   ऊपर एकरसाभ्यासो दौर्बल्यकराणाम् ( च.सू॰ इन्द्रियों काबल बढ़ता है॰ इसके विपरीते कर रहे हैं ~ सर्वरसाभ्यासो बलकराणाम्न तथारः रसों का प्रतिदिन सेवन करने से देह ंतथा  विटामिनों से भरपूर हैं और इनसे ह्ोती है। आज की भाषा में ये॰ सभीररस ॰ मधुर आदि छहों पड़ता रहतो है। होती है, जिनकी प्रतिदिन शरीर को आवश्यकता সানতো ন্ধলে ম बलहानि शरौर के उन आवश्यक तत्त्वों की पूर्ति विधिस्त्याज्यः सेवनीयोडपरः क्रमात्।I ؟a ऋत्वोरन्यादिसम्ताहावृतुसन्धिरितिो  तत्र स्मृतः स्युः सहसा त्यागशीलनात्।[ sraiafiefa amna gaa aiiemnenifan  7: असात्म्यजा II 3 IL इति तृतीयोडध्यायः नाम ऋतुचर्या " सूत्रस्थाने प्रथमे का अन्तिम सप्ताह डैं। प्रथम ऋतु कभी मल्टीविटामिन खानेकीजरूरत नहींपड़ेगी| मिथुन,  कर्क मोन 4 तुला, वृश्चिक मध्य TTTT9TT দালুন; ঈন্ आषाढ़ , श्रावण எட अपराहकाल पूर्वाहकाल अर्धरात्रिन अर्थात् aক, মাম कष्टों स्वस्वाधिक्यमृतावृतौ  ||4৩ || नित्यं   सर्वरसाभ्यासः वे प्रायः ऋतुओं में प्रतिदिन सभनी ( छहों ) रसों का सेवन करेना चाहिए तथा किप आव्विन ೫ ಳ -निर्देश   सभी  रससेवन - निर्देश दिया गया है, उस-उस ऋतु में उस-उस रस का में जिन-जिन रसों के सेवन का विशेष 6 Td सेवन करना चाहिए।। ५७ ।। समर्थन महर्षि चरक इस प्रकार कहा है॰ इसका नित्यं सर्वरसाभ्यासः जो वाग्भट ने ২4/Y০ ) সথনি वक्तव्य   ऊपर एकरसाभ्यासो दौर्बल्यकराणाम् ( च.सू॰ इन्द्रियों काबल बढ़ता है॰ इसके विपरीते कर रहे हैं ~ सर्वरसाभ्यासो बलकराणाम्न तथारः रसों का प्रतिदिन सेवन करने से देह ंतथा  विटामिनों से भरपूर हैं और इनसे ह्ोती है। आज की भाषा में ये॰ सभीररस ॰ मधुर आदि छहों पड़ता रहतो है। होती है, जिनकी प्रतिदिन शरीर को आवश्यकता সানতো ন্ধলে ম बलहानि शरौर के उन आवश्यक तत्त्वों की पूर्ति विधिस्त्याज्यः सेवनीयोडपरः क्रमात्।I ؟a ऋत्वोरन्यादिसम्ताहावृतुसन्धिरितिो  तत्र स्मृतः स्युः सहसा त्यागशीलनात्।[ sraiafiefa amna gaa aiiemnenifan  7: असात्म्यजा II 3 IL इति तृतीयोडध्यायः नाम ऋतुचर्या " सूत्रस्थाने प्रथमे का अन्तिम सप्ताह डैं। प्रथम ऋतु - ShareChat