🗓️ आठवडा १
१) कोमट लिंबू पाणी
साहित्य: १ ग्लास कोमट पाणी, ½ लिंबाचा रस
कृती:
१. पाणी कोमट करून घ्या.
२. त्यात ताज्या लिंबाचा रस पिळा.
३. चांगले ढवळा आणि रिकाम्या पोटी प्या.
२) पालक-आले स्मूदी
साहित्य: १ कप पालक, ½ इंच आले, १ सफरचंद, १ ग्लास पाणी
कृती:
१. सर्व साहित्य स्वच्छ धुवा.
२. मिक्सरमध्ये टाका.
३. गुळगुळीत होईपर्यंत ब्लेंड करा.
४. लगेच सर्व्ह करा.
३) हळद दूध (गोल्डन मिल्क)
साहित्य: १ कप दूध, ½ टीस्पून हळद
कृती:
१. दूध गरम करा.
२. त्यात हळद घाला.
३. चांगले मिसळून कोमट असताना प्या.
४) काकडी-पुदिना डिटॉक्स
साहित्य: काकडीचे काप, पुदिन्याची पाने, १ ग्लास पाणी
कृती:
१. पाण्यात काकडीचे काप टाका.
२. पुदिन्याची पाने घाला.
३. २–३ तास ठेवून नंतर प्या.
५) बीट-गाजर ज्यूस
साहित्य: १ बीट, १ गाजर
कृती:
१. साल काढून तुकडे करा.
२. ज्यूसरमध्ये काढा.
३. ताजे प्या.
६) आवळा शॉट
साहित्य: २-३ आवळे
कृती:
१. आवळ्याचा रस काढा.
२. थोडे पाणी मिसळा.
३. सकाळी रिकाम्या पोटी प्या.
🗓️ आठवडा २
७) नारळ पाणी
कृती:
१. ताजे नारळ पाणी घ्या.
२. थेट प्या.
८) चिया सीड वॉटर
साहित्य: १ ग्लास पाणी, १ टीस्पून चिया बिया
कृती:
१. पाण्यात चिया बिया भिजवा (रात्रीभर).
२. सकाळी ढवळून प्या.
९) कोरफड ज्यूस
साहित्य: २ चमचे कोरफड जेल
कृती:
१. कोरफडीचे जेल काढा.
२. पाण्यात मिसळा.
३. लगेच प्या.
१०) मिक्स बेरी स्मूदी
साहित्य: मिक्स बेरी, दही
कृती:
१. सर्व साहित्य ब्लेंड करा.
२. गार सर्व्ह करा.
११) जिरे पाणी
साहित्य: १ ग्लास पाणी, १ टीस्पून जिरे
कृती:
१. पाण्यात जिरे उकळा.
२. गाळून कोमट प्या.
१२) कलिंगड ज्यूस
कृती:
१. कलिंगडाचे तुकडे करा.
२. ब्लेंड करा.
३. गाळून प्या.
🗓️ आठवडा ३
१३) आले-लिंबू चहा
साहित्य: आले, लिंबू, पाणी
कृती:
१. पाणी उकळा.
२. आले घाला.
३. गाळून लिंबू रस मिसळा.
१४) पपई स्मूदी
साहित्य: पपई, दूध
कृती:
१. पपईचे तुकडे करा.
२. दूध घालून ब्लेंड करा.
१५) दालचिनी पाणी
साहित्य: १ तुकडा दालचिनी, १ ग्लास पाणी
कृती:
१. पाण्यात दालचिनी उकळा.
२. गाळून प्या.
१६) टोमॅटो ज्यूस
कृती:
१. टोमॅटो उकळून साल काढा.
२. ब्लेंड करा.
३. चिमूटभर मीठ घाला.
१७) सफरचंद व्हिनेगर ड्रिंक
साहित्य: १ ग्लास पाणी, १ टीस्पून सफरचंद व्हिनेगर
कृती:
१. पाण्यात व्हिनेगर मिसळा.
२. नीट ढवळा आणि प्या.
१८) पुदिना-कोथिंबीर ज्यूस
साहित्य: पुदिना, कोथिंबीर, लिंबू
कृती:
१. सर्व साहित्य ब्लेंड करा.
२. गाळून प्या.
🗓️ आठवडा ४
१९) कोमट पाणी + मध
साहित्य: १ ग्लास कोमट पाणी, १ टीस्पून मध
कृती:
१. पाण्यात मध मिसळा.
२. सकाळी प्या.
२०) केळी-ओट्स स्मूदी
साहित्य: १ केळं, २ चमचे ओट्स, दूध
कृती:
१. सर्व साहित्य ब्लेंड करा.
२. लगेच प्या.
२१) बडीशेप पाणी
साहित्य: १ टीस्पून बडीशेप, १ ग्लास पाणी
कृती:
१. रात्री पाण्यात भिजवा.
२. सकाळी उकळून गाळा.
३. प्या.
२२) डाळिंब ज्यूस
कृती:
१. डाळिंब दाणे काढा.
२. ब्लेंड करून गाळा.
३. ताजे प्या.
२३) ताक (मठ्ठा)
साहित्य: दही, पाणी, मीठ
कृती:
१. दही व पाणी एकत्र घुसळा.
२. चवीनुसार मीठ घाला.
३. थंड प्या.
२४) संत्रा ज्यूस
कृती:
१. संत्र्याचा रस काढा.
२. गाळून ताजे प्या.
🗓️ आठवडा ५
२५) ABC ज्यूस (सफरचंद, बीट, गाजर)
कृती:
१. सर्व तुकडे करा.
२. ज्यूसरमध्ये काढा.
३. लगेच प्या.
२६) नाचणी सत्व
साहित्य: २ चमचे नाचणी पीठ, दूध/पाणी
कृती:
१. पाण्यात/दुधात पीठ मिसळा.
२. मंद आचेवर शिजवा.
३. कोमट प्या.
२७) तुळशीचा चहा
साहित्य: तुळशीची पाने, पाणी
कृती:
१. पाणी उकळा.
२. तुळशीची पाने घाला.
३. गाळून प्या.
२८) दुधी भोपळा ज्यूस
कृती:
१. साल काढून तुकडे करा.
२. ब्लेंड करून गाळा.
३. ताजे प्या.
२९) गव्हाचे तृण ज्यूस
कृती:
१. गव्हाचे तृण धुवा.
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देसी स्वाद का खजाना है सत्तू,
सेहत का ये सच्चा साथी है सत्तू।
ठंडक दे तन को, ताकत दे मन को,
हर घर की शान पुराना है सत्तू। 💛
📝 सामग्री:
2 कप चना (देसी काला चना)
1/2 कप जौ (वैकल्पिक)
1/2 कप गेहूं (वैकल्पिक)
👩🍳 बनाने की विधि:
1️⃣ चना भूनना:
सबसे पहले चना साफ करके धूप में सुखा लें।
कढ़ाई गरम करें और धीमी आंच पर चना लगातार चलाते हुए 15–20 मिनट तक भूनें।
जब चना कुरकुरा और हल्का सुनहरा हो जाए, गैस बंद कर दें।
👉 अगर जौ और गेहूं डाल रहे हैं, तो उन्हें भी अलग-अलग इसी तरह भून लें।
2️⃣ ठंडा करना:
भुने हुए चने को पूरी तरह ठंडा होने दें।
3️⃣ पीसना:
मिक्सर ग्राइंडर या चक्की में भुना चना (और जौ/गेहूं) डालकर बारीक पीस लें।
चाहें तो महीन छलनी से छान लें ताकि पाउडर बिल्कुल स्मूद बने।
4️⃣ स्टोर करना:
तैयार सत्तू को एयरटाइट डिब्बे में भरकर रखें।
यह 1–2 महीने तक आसानी से सुरक्षित रहता है।
🥤 सत्तू का शरबत बनाने का तरीका:
नमकीन सत्तू:
2 चम्मच सत्तू
1 गिलास ठंडा पानी
काला नमक, भुना जीरा पाउडर
नींबू रस और बारीक कटा प्याज
सबको अच्छे से मिलाएं और ठंडा-ठंडा परोसें।
मीठा सत्तू:
2 चम्मच सत्तू
1 गिलास ठंडा पानी या दूध
1–2 चम्मच चीनी या गुड़
अच्छे से घोलकर सर्व करें।
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नई-नई शादी के बाद शारीरिक क्षमता (मर्दाना ताक़त)
नई-नई शादी के बाद तंदरुस्त पति-पत्नी एक रात में 4 या 5 बार भी संबंध बना सकते हैं। यह बात हैरान करने वाली नहीं है। अगर शोध किया जाए तो ऐसे बहुत-से उदाहरण मिल जाएंगे।
शादी के शुरुआती दिनों में कुछ समय तक रात में 2-3 बार संबंध बनाना ज़्यादातर दंपतियों के लिए सामान्य बात होती है।
लेकिन जो लोग मर्दाना कमजोरी का शिकार होते हैं, उनके लिए हमने यहाँ
👉 मर्दाना कमजोरी के कारण, लक्षण और घरेलू इलाज विस्तार से बताए हैं।
मर्दाना कमजोरी के कारण (वजहें)
मर्दाना कमजोरी होने के कुछ मुख्य कारण इस प्रकार हैं:
ज़िंदगी में ज़्यादा तनाव
घर का छोटा होना, जिससे संबंध बनाते समय एकांत न मिलना
आर्थिक परेशानियाँ
अधूरा या गलत यौन ज्ञान
मधुमेह (डायबिटीज़)
बार-बार हस्तमैथुन
गुप्त अंग पर चोट
मोटापा
संबंध बनाते समय डर या घबराहट
बार-बार पेशाब आना
बदहज़मी
ज़्यादा शराब पीना
यह बीमारी कभी मानसिक, कभी वीर्य की कमजोरी, तो कभी प्रजनन तंत्र की क्षति के कारण भी हो सकती है।
मर्दाना कमजोरी के लक्षण
संबंध बनाते समय लिंग में पूरा तनाव न आना
उत्तेजना आते ही वीर्य का जल्दी निकल जाना
पुरुष का शर्मिंदा और दुखी रहने लगना
हर समय चिंताओं में डूबे रहना
सिर चकराना
दिल की धड़कन तेज़ हो जाना
इन सब कारणों से व्यक्ति मानसिक रूप से परेशान नज़र आने लगता है।
फायदे
✔️ धातु रोग (जिरयान) का स्थायी इलाज
✔️ वीर्य को अत्यधिक ताक़त देता है
✔️ वीर्य की मात्रा बढ़ाकर गाढ़ापन लाता है
✔️ ज़्यादा संबंध बनाने से आई कमजोरी दूर करता है
✔️ मर्दाना कमजोरी खत्म कर जवानी बहाल करता है
✔️ संबंध के बाद कमजोरी महसूस नहीं होती
✔️ कुछ ही दिनों में असर दिखाता है
✔️ एक महीने के नियमित सेवन से खोई हुई ताक़त वापस आ जाती है
सामग्री (Ingredients)
गोंद सांभल / गोंद सेमल – 20 ग्राम
समंदर सुख (समुंदर सोख / समुद्रफेन) – 20 ग्राम
तेजसुघ / तेजसुक – 20 ग्राम
बीज बंड – 20 ग्राम
सफेद मूसली – 20 ग्राम
काली मूसली – 20 ग्राम
तालमखाना (फॉक्स नट / मखाना) – 20 ग्राम
सालब मिश्री (सालम पंजा / सलप दाना) – 20 ग्राम
गोंद छुहारा – 20 ग्राम
सूखा सिंघाड़ा – 20 ग्राम
बोपली / बबूल फल – 20 ग्राम
गोंद बबूल – 20 ग्राम
शतावरी – 20 ग्राम
बहेमन लाल (बहेमन सुर्ख) – 20 ग्राम
बहेमन सफेद – 20 ग्राम
कौंच बीज (कपिकच्छु) – 20 ग्राम
गोंद कतीरा – 20 ग्राम
पीपल गोंद – 20 ग्राम
कपास का बीज (मग़ज़ बनौला) – 20 ग्राम
बनाने की विधि (तैयारी)
सभी सामग्री को साफ़ करके अच्छी तरह सुखा लें
फिर बारीक पीसकर चूर्ण बना लें
सेवन विधि
👉 1 बड़ा चम्मच सुबह और शाम
👉 गुनगुने दूध के साथ सेवन करें
❣️ सबसे बेहतर इंसान वही है जो दूसरों को फायदा पहुँचाए ❣️
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गेहूं, ज्वार, बाजरा, रागी और मक्का की रोटी के फायदे
गेहूं की रोटी
गेहूं की रोटी सबसे सामान्य और पौष्टिक भोजन माना जाता है। इसमें कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और फाइबर अच्छी मात्रा में होते हैं, जो शरीर को ऊर्जा देते हैं। यह पाचन को बेहतर बनाती है और पेट को लंबे समय तक भरा रखती है। गेहूं में मौजूद आयरन और विटामिन B शरीर की कमजोरी दूर करने में मदद करते हैं।
ज्वार की रोटी
ज्वार की रोटी ग्लूटेन-फ्री होती है, इसलिए यह एलर्जी वाले लोगों के लिए अच्छी मानी जाती है। इसमें फाइबर अधिक होता है, जिससे पाचन मजबूत होता है और वजन नियंत्रित रहता है। यह ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल को संतुलित रखने में भी मदद करती है।
बाजरे की रोटी
बाजरे की रोटी शरीर को गर्म रखने में मदद करती है, इसलिए सर्दियों में इसे ज्यादा खाया जाता है। इसमें कैल्शियम, आयरन और मिनरल्स भरपूर होते हैं, जो हड्डियों और शरीर को मजबूत बनाते हैं। यह रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी सहायक होती है।
रागी की रोटी
रागी कैल्शियम का बहुत अच्छा स्रोत है, जिससे हड्डियां और दांत मजबूत होते हैं। इसमें आयरन और फाइबर भी होता है, जो खून बढ़ाने और पाचन सुधारने में मदद करता है। रागी की रोटी डायबिटीज के मरीजों के लिए भी फायदेमंद मानी जाती है।
मक्का की रोटी
मक्का की रोटी फाइबर से भरपूर होती है, जिससे पाचन सही रहता है। यह शरीर को ऊर्जा देती है और आंखों की सेहत के लिए भी लाभदायक मानी जाती है। यह वजन नियंत्रित रखने और दिल को स्वस्थ रखने में मदद करती है।
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गेहूं, ज्वार, बाजरा, रागी और मक्का की रोटी के फायदे
गेहूं की रोटी
गेहूं की रोटी सबसे सामान्य और पौष्टिक भोजन माना जाता है। इसमें कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और फाइबर अच्छी मात्रा में होते हैं, जो शरीर को ऊर्जा देते हैं। यह पाचन को बेहतर बनाती है और पेट को लंबे समय तक भरा रखती है। गेहूं में मौजूद आयरन और विटामिन B शरीर की कमजोरी दूर करने में मदद करते हैं।
ज्वार की रोटी
ज्वार की रोटी ग्लूटेन-फ्री होती है, इसलिए यह एलर्जी वाले लोगों के लिए अच्छी मानी जाती है। इसमें फाइबर अधिक होता है, जिससे पाचन मजबूत होता है और वजन नियंत्रित रहता है। यह ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल को संतुलित रखने में भी मदद करती है।
बाजरे की रोटी
बाजरे की रोटी शरीर को गर्म रखने में मदद करती है, इसलिए सर्दियों में इसे ज्यादा खाया जाता है। इसमें कैल्शियम, आयरन और मिनरल्स भरपूर होते हैं, जो हड्डियों और शरीर को मजबूत बनाते हैं। यह रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी सहायक होती है।
रागी की रोटी
रागी कैल्शियम का बहुत अच्छा स्रोत है, जिससे हड्डियां और दांत मजबूत होते हैं। इसमें आयरन और फाइबर भी होता है, जो खून बढ़ाने और पाचन सुधारने में मदद करता है। रागी की रोटी डायबिटीज के मरीजों के लिए भी फायदेमंद मानी जाती है।
मक्का की रोटी
मक्का की रोटी फाइबर से भरपूर होती है, जिससे पाचन सही रहता है। यह शरीर को ऊर्जा देती है और आंखों की सेहत के लिए भी लाभदायक मानी जाती है। यह वजन नियंत्रित रखने और दिल को स्वस्थ रखने में मदद करती है।
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