#महाभारत #जय श्री कृष्ण
अर्जुन का धनुष हाथ में था,
पर मन के भीतर हलचल थी।
सामने खड़े थे वही लोग —
जिनके साथ बचपन खेला था,
जिनसे गुरु का ज्ञान पाया था,
जिनके चरण छूकर हर युद्ध में उतरा था।
अर्जुन ने भारी स्वर में कहा —
“केशव… सामने अपने ही हैं।” 💯🔥
श्रीकृष्ण मुस्कराए।
वो मुस्कान, जिसमें करुणा भी थी और कठोर सत्य भी।
धीरे से बोले —
“अगर अपने हैं अर्जुन,
तो फिर सामने क्यों खड़े हैं?”
क्षण भर को समय थम गया।
कृष्ण आगे बोले —
“अपने वो होते हैं,
जो धर्म के साथ खड़े हों।
जो अन्याय के खिलाफ़ हों।
जो सच के लिए खड़े हों…
भले ही अकेले क्यों न हों।”
“और जो अधर्म के साथ खड़े हों अर्जुन,
चाहे वो खून के रिश्ते हों,
गुरु हों या भाई —
वो सामने ही होते हैं।”
अर्जुन की आँखों में संकोच था,
पर मन में धीरे-धीरे स्पष्टता उतर रही थी।
कृष्ण ने कहा —
“युद्ध रिश्तों से नहीं लड़ा जाता,
युद्ध धर्म से लड़ा जाता है।”
“अगर तू आज पीछे हटा,
तो जीत अधर्म की होगी।
और याद रख अर्जुन —
धर्म के साथ खड़ा होना
सबसे बड़ा अपनापन है।”
अर्जुन ने गहरी साँस ली,
धनुष कसकर थामा…
और समझ गया —
जो अपने होते हैं,
वो कभी सामने नहीं होते।
वो हमेशा साथ खड़े होते हैं। 🔥🙏


