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##जय मां गायत्री जय गुरुवर
#जय मां गायत्री जय गुरुवर - मृत्यु का भय दूर कर दीजिए मृत्यु से मनुष्य बहुत डरता है। इस डर के कारण की खोज " करने पर प्रतीत होता है कि मनुष्य  मृत्यु से नहीं वरन अपने पापों के दुष्परिणामों से डरता है। देखा जाता है कि यदि मनुष्य को कहीं कष्ट या विपत्ति के स्थान में जाना पडे़, तो वह जाते समय  डरता और व्याकुल होता है। मृत्यु से मनुष्य इसलिए " agd घबराता है कि उसकी अंतःचेतना ऐसा अनुभव करती है कि इस * जीवन का मैंने जो दुरुपयोग किया है, उसके फलस्वरूप मरने  के पश्चात् मुझे दुर्गति में जाना पड़ेगा | जब कोई व्यक्ति वर्तमान की अपेक्षा अधिक अच्छी उन्नत और सुखकर परिस्थिति के लिए  है, तो उसे जाते समय कुछ भी कष्ट नहीं होता, वरन् जाता होती है।जो लोग अपने जीवन को निर्थक अनुचित  प्रसन्नता और अनुपयोगी कार्यों में खर्च कर रहे हैं॰ वे लोग मृत्यु से उसी  प्रकार डरते हैं जैसे बकरा कसाईखाने के दरवाजे में घुसता  हुआ भावी पीडा की आशंका से डरता है। भय से बचना चाहते हैं॰ तो अपने जीवन यदि आप मृत्यु के सदुपयोग करना, अपने कार्यक्रम को धर्ममय बनाना आरंभ 877 दीजिए। ऐसा करने से आप की अंतःचेतना को यह विश्वास  कर होने लगेगा कि भविष्य अंधकारमय नहीं वरन् प्रकाशपूर्ण है। में हुआ  जिस क्षण यह विश्वास हृदय उसी क्षण मृत्यु का भय भाग जाता है। तब वह शरीर  परिवर्तन को वस्त्र- परिवर्तन की बात समझता है और उससे जरा भी डरता या तरह मामूली Ta घबराता नही   अखण्ठ न्योति सितवर १९४४ पृष्ठन५ मृत्यु का भय दूर कर दीजिए मृत्यु से मनुष्य बहुत डरता है। इस डर के कारण की खोज " करने पर प्रतीत होता है कि मनुष्य  मृत्यु से नहीं वरन अपने पापों के दुष्परिणामों से डरता है। देखा जाता है कि यदि मनुष्य को कहीं कष्ट या विपत्ति के स्थान में जाना पडे़, तो वह जाते समय  डरता और व्याकुल होता है। मृत्यु से मनुष्य इसलिए " agd घबराता है कि उसकी अंतःचेतना ऐसा अनुभव करती है कि इस * जीवन का मैंने जो दुरुपयोग किया है, उसके फलस्वरूप मरने  के पश्चात् मुझे दुर्गति में जाना पड़ेगा | जब कोई व्यक्ति वर्तमान की अपेक्षा अधिक अच्छी उन्नत और सुखकर परिस्थिति के लिए  है, तो उसे जाते समय कुछ भी कष्ट नहीं होता, वरन् जाता होती है।जो लोग अपने जीवन को निर्थक अनुचित  प्रसन्नता और अनुपयोगी कार्यों में खर्च कर रहे हैं॰ वे लोग मृत्यु से उसी  प्रकार डरते हैं जैसे बकरा कसाईखाने के दरवाजे में घुसता  हुआ भावी पीडा की आशंका से डरता है। भय से बचना चाहते हैं॰ तो अपने जीवन यदि आप मृत्यु के सदुपयोग करना, अपने कार्यक्रम को धर्ममय बनाना आरंभ 877 दीजिए। ऐसा करने से आप की अंतःचेतना को यह विश्वास  कर होने लगेगा कि भविष्य अंधकारमय नहीं वरन् प्रकाशपूर्ण है। में हुआ  जिस क्षण यह विश्वास हृदय उसी क्षण मृत्यु का भय भाग जाता है। तब वह शरीर  परिवर्तन को वस्त्र- परिवर्तन की बात समझता है और उससे जरा भी डरता या तरह मामूली Ta घबराता नही   अखण्ठ न्योति सितवर १९४४ पृष्ठन५ - ShareChat