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##जय मां गायत्री जय गुरुवर
#जय मां गायत्री जय गुरुवर - ahamikumi Fad हम बदलेंगे - युग बदलेगा जीवन का अर्थ है समय। जो जीवन से प्यार करते हों वे आलस्य में समय न गँवाएँ। पं० श्रीराम शर्मा आचार्य ೊPIrilr } _ दी  1 शताब्दी समारोह २०२६ 4926 2026 ` ~ a परम वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा एवं दिव्य अखंड दीप Youlube Shantikunjvideo - awgp Shantikunj whatsApp- 9258352222 WWW awgp org ahamikumi Fad हम बदलेंगे - युग बदलेगा जीवन का अर्थ है समय। जो जीवन से प्यार करते हों वे आलस्य में समय न गँवाएँ। पं० श्रीराम शर्मा आचार्य ೊPIrilr } _ दी  1 शताब्दी समारोह २०२६ 4926 2026 ` ~ a परम वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा एवं दिव्य अखंड दीप Youlube Shantikunjvideo - awgp Shantikunj whatsApp- 9258352222 WWW awgp org - ShareChat
##जय मां गायत्री जय गुरुवर
#जय मां गायत्री जय गुरुवर - श्री हनुमान मंदिर - शांतिकुंज हरिद्वार मता मगवन ६व रामा  25 April - २०२६ वंदनीया माताजी की जन्म शताब्दी शुक्ल पक्ष एवं दिव्य अखण्ड दीप का महापर्व २०२६ नवमी 2083 awgpofficial wuuawgporg  YoU TU3g Shantiltunj Rishi Chintan . 8439014110 श्री हनुमान मंदिर - शांतिकुंज हरिद्वार मता मगवन ६व रामा  25 April - २०२६ वंदनीया माताजी की जन्म शताब्दी शुक्ल पक्ष एवं दिव्य अखण्ड दीप का महापर्व २०२६ नवमी 2083 awgpofficial wuuawgporg  YoU TU3g Shantiltunj Rishi Chintan . 8439014110 - ShareChat
##जय मां गायत्री जय गुरुवर
#जय मां गायत्री जय गुरुवर - शशान्तिकुनवेडिय అlgIIC 2026 92583522<2 १४| %६ आज कासदचित्तन शलिकनताठ aa & पाठको ! अध्या्त्म जाट्रूगरी . डरन कही आसभान से बरसने वाले तरदान अठदान| देवी देननाओरं का शी यह द्यंद्या नही टै कि चापलसी करनेवालों ठो निहाम ऊॅरते रहेंऔरजो शनके लि< द्यप नदे से उन्टें उपेश्षित रखे या आक्रौश  तनाय्े। वस्तुतः दैवत्व आत्म्जगणं का शराजन दीरस्थितिविशेष टैज़िसमें अपनेः (೩೬ ೯7 वर्चस्वतो प्रगत्नर्श्वक ठूम मेलाग जनां ढथ२ सत्प्यासों @ा अधिकाटलात् : আন Sdl ಜ @s WhatsApp 8439014110 Shantikunj हम सुधरेंगे, युग सुधरेगा हम बदलेंगे, युग बदलेगा awgpofficial Shantikunj Rishi Chintan Shantikun] Video BWWWaWgporg Iulig IIIరి  शशान्तिकुनवेडिय అlgIIC 2026 92583522<2 १४| %६ आज कासदचित्तन शलिकनताठ aa & पाठको ! अध्या्त्म जाट्रूगरी . डरन कही आसभान से बरसने वाले तरदान अठदान| देवी देननाओरं का शी यह द्यंद्या नही टै कि चापलसी करनेवालों ठो निहाम ऊॅरते रहेंऔरजो शनके लि< द्यप नदे से उन्टें उपेश्षित रखे या आक्रौश  तनाय्े। वस्तुतः दैवत्व आत्म्जगणं का शराजन दीरस्थितिविशेष टैज़िसमें अपनेः (೩೬ ೯7 वर्चस्वतो प्रगत्नर्श्वक ठूम मेलाग जनां ढथ२ सत्प्यासों @ा अधिकाटलात् : আন Sdl ಜ @s WhatsApp 8439014110 Shantikunj हम सुधरेंगे, युग सुधरेगा हम बदलेंगे, युग बदलेगा awgpofficial Shantikunj Rishi Chintan Shantikun] Video BWWWaWgporg Iulig IIIరి - ShareChat
##जय मां गायत्री जय गुरुवर
#जय मां गायत्री जय गुरुवर - allzzilcilzl शान्तिकुञ्ज  सदस्यों ब्दारा, और परिवार में एक॰ ೯ विशेषतया परिवार प्रमुख ब्दवारा, किसी एक सढस्य को मुख्यता ढेना, उस पर अधिक व्यय करना ক স্নি अथवा अधिक स्नेह रखना , और ढूसरों उढ़ासीनता अथवा उपेक्षा का भाव रखना, उनमें ईर्ष्या द्देष की वृद्धि करने लगता है। अख्रण्ड ज्योति १९६८ जुलाई हम बदलेंगे - युग बदलेगा , हम सुधरेंगे - युग सुधरेगा वंदनीया माताजी की जन्म शताब्दी வய 1021 . 9026 दिव्य प्रकाश का महापर्व २०२६ awgpofficial WWW.awgp..rg' 8439014110 YಚuTUBE Shantilunj Rishi Chintan allzzilcilzl शान्तिकुञ्ज  सदस्यों ब्दारा, और परिवार में एक॰ ೯ विशेषतया परिवार प्रमुख ब्दवारा, किसी एक सढस्य को मुख्यता ढेना, उस पर अधिक व्यय करना ক স্নি अथवा अधिक स्नेह रखना , और ढूसरों उढ़ासीनता अथवा उपेक्षा का भाव रखना, उनमें ईर्ष्या द्देष की वृद्धि करने लगता है। अख्रण्ड ज्योति १९६८ जुलाई हम बदलेंगे - युग बदलेगा , हम सुधरेंगे - युग सुधरेगा वंदनीया माताजी की जन्म शताब्दी வய 1021 . 9026 दिव्य प्रकाश का महापर्व २०२६ awgpofficial WWW.awgp..rg' 8439014110 YಚuTUBE Shantilunj Rishi Chintan - ShareChat
##जय मां गायत्री जय गुरुवर
#जय मां गायत्री जय गुरुवर - दिनांक 25 इस बात का शोक मत करो कि मुझे बार-्बार असफल होना पडता है ٦٩١ मत करो क्योंकि समय अनंत है না-না प्रयत्न करो और आगे की ओर कदम ஈள निरंतर कर्त्तव्य करते रहो, आज तो कल तुम सफल होकर रहोगे  सहायता के लिए दूसरों के सामने मत गिड़गिड़ाओ क्योंकि यथार्थ में किसी र्मे इतनी शंक्ति नर्हीं है जो = तुम्हारी सहायता साकेरपफि लिए ক্িমী কমভ ৯ दूसरों मत करो, क्योकि यथार्थ में எ बुमपेने दुःमख्र ह्रीं औँरँचस व्यकही तुम मित्र हो और स्वयं ही अपने ؟ कुछ भली -बुरी स्थितियाँ सामने वह तुम्हारी ही पैदा की हुई हैं । अपना दृष्टिकोण बदल दोगे तो दूसरे ही क्षण यह भेय के भूत अंतरिक्ष में तिरोहित हो जावेंगे हारिए न हिम्मत /२६ दिनांक 25 इस बात का शोक मत करो कि मुझे बार-्बार असफल होना पडता है ٦٩١ मत करो क्योंकि समय अनंत है না-না प्रयत्न करो और आगे की ओर कदम ஈள निरंतर कर्त्तव्य करते रहो, आज तो कल तुम सफल होकर रहोगे  सहायता के लिए दूसरों के सामने मत गिड़गिड़ाओ क्योंकि यथार्थ में किसी र्मे इतनी शंक्ति नर्हीं है जो = तुम्हारी सहायता साकेरपफि लिए ক্িমী কমভ ৯ दूसरों मत करो, क्योकि यथार्थ में எ बुमपेने दुःमख्र ह्रीं औँरँचस व्यकही तुम मित्र हो और स्वयं ही अपने ؟ कुछ भली -बुरी स्थितियाँ सामने वह तुम्हारी ही पैदा की हुई हैं । अपना दृष्टिकोण बदल दोगे तो दूसरे ही क्षण यह भेय के भूत अंतरिक्ष में तिरोहित हो जावेंगे हारिए न हिम्मत /२६ - ShareChat
##जय मां गायत्री जय गुरुवर
#जय मां गायत्री जय गुरुवर - २५ अप्रैल १६७२ मुगल आक्रमणकारियों को मातृभूमि से खदेड़़ देने वाले पूर्वोत्तर भारत के शिवाजी महान योद्धा एवं कुशल रणनीतिकार लाचित बरफुकन पुण्यतिथि पर कोटि कोटि नमन २५ अप्रैल १६७२ मुगल आक्रमणकारियों को मातृभूमि से खदेड़़ देने वाले पूर्वोत्तर भारत के शिवाजी महान योद्धा एवं कुशल रणनीतिकार लाचित बरफुकन पुण्यतिथि पर कोटि कोटि नमन - ShareChat
##जय मां गायत्री जय गुरुवर
#जय मां गायत्री जय गुरुवर - কম্ানী जो जीवन बदल दे। அடபபக  ா महर्षि কর   মরমীণবনী ঠাঁব ম ৎক J $ 31T9T बार अपने कौटुम्बिक जीवन अध्यापक   रहते थे। एक से अत्याधिक क्षुब्ध होकर आत्महत्या करने की बात सोचने   लगे। किसी निर्णय पर पहुँचने से पहले उन्होंने महर्षि की और   पहुँच उनके মম্সনি  তাননী   ব্রামী गए आश्रम। महर्षि आश्रमवासियों के भोजन के लिए पत्त्ाल रमण दिव्यदृष्टा ऋषि ने अध्यापक महोदय के बना रहे थे। का अभिप्राय समझ लिया था। आने करने aid- के उपरांत अध्यापक प्रणाम भगवन! आप इन पत्तालोंको रहे परिश्रम के साथ इतने ননা ব্ানা ব্াকয কঁক ঠঠীI हैं और आश्रमवासी इनमें ஈ64 हुए  बोले- वस्तु का पूर्ण उपयोग हो ಶಹ್ಾಗ' पर उसे फेंक देना बुरा नहीं॰ बुरा तो तब है जाने 3 3ி 3নখো মঁ  ৪ী करके   ्फेंक जब खराब दियाजाए। को   महर्षि का   मर्मस्पर्शी अभिप्राय अध्यापक महादय और उन्होंने आत्महत्या   करने समझ में आ ঠাযা করা इरादा छोड़ दिया। अखंड ज्योति अप्रैल १९९९ কম্ানী जो जीवन बदल दे। அடபபக  ா महर्षि কর   মরমীণবনী ঠাঁব ম ৎক J $ 31T9T बार अपने कौटुम्बिक जीवन अध्यापक   रहते थे। एक से अत्याधिक क्षुब्ध होकर आत्महत्या करने की बात सोचने   लगे। किसी निर्णय पर पहुँचने से पहले उन्होंने महर्षि की और   पहुँच उनके মম্সনি  তাননী   ব্রামী गए आश्रम। महर्षि आश्रमवासियों के भोजन के लिए पत्त्ाल रमण दिव्यदृष्टा ऋषि ने अध्यापक महोदय के बना रहे थे। का अभिप्राय समझ लिया था। आने करने aid- के उपरांत अध्यापक प्रणाम भगवन! आप इन पत्तालोंको रहे परिश्रम के साथ इतने ননা ব্ানা ব্াকয কঁক ঠঠীI हैं और आश्रमवासी इनमें ஈ64 हुए  बोले- वस्तु का पूर्ण उपयोग हो ಶಹ್ಾಗ' पर उसे फेंक देना बुरा नहीं॰ बुरा तो तब है जाने 3 3ி 3নখো মঁ  ৪ী करके   ्फेंक जब खराब दियाजाए। को   महर्षि का   मर्मस्पर्शी अभिप्राय अध्यापक महादय और उन्होंने आत्महत्या   करने समझ में आ ঠাযা করা इरादा छोड़ दिया। अखंड ज्योति अप्रैल १९९९ - ShareChat
##जय मां गायत्री जय गुरुवर
#जय मां गायत्री जय गुरुवर - छन्मरतळीनष२०२डशनकुकत दोडिये 9258352222 दि११ | ४१०६ आज कासदचिन्तन श लिकताठ अपने  गुण ~ कर्म ~ स्वभाव  का अन्दर  विद्यभान सत्ता पर परिष्कार , विश्वास   तथा प्रापणिकता का परिचय द्वैकरे எஞ 37 ஒணaளள் कि ईश्वरीय अलोक` उसके अन्दर ஒக  श्रवैश कॅर ` सके उपाय  अपनाने होते ऐ वे भौ अपने स्थान पर अनिवर्य   हं , उपासना, साधना , आरिाधना विविध ं उपक्रम अपनाने होते గగ % c1' वै इसी निभित्र होते हें | % 910|60|-?8<_ Shantikunj WhatsApp - 8439014110 हम सुधरेंगे, युग सुधरेगा ননলয हम बदलेंगे, युग बदलेगा IShantikunj Rishi Chintan awgpofficial wwwagporg Shantikun] Video Iulig A1ulutg छन्मरतळीनष२०२डशनकुकत दोडिये 9258352222 दि११ | ४१०६ आज कासदचिन्तन श लिकताठ अपने  गुण ~ कर्म ~ स्वभाव  का अन्दर  विद्यभान सत्ता पर परिष्कार , विश्वास   तथा प्रापणिकता का परिचय द्वैकरे எஞ 37 ஒணaளள் कि ईश्वरीय अलोक` उसके अन्दर ஒக  श्रवैश कॅर ` सके उपाय  अपनाने होते ऐ वे भौ अपने स्थान पर अनिवर्य   हं , उपासना, साधना , आरिाधना विविध ं उपक्रम अपनाने होते గగ % c1' वै इसी निभित्र होते हें | % 910|60|-?8<_ Shantikunj WhatsApp - 8439014110 हम सुधरेंगे, युग सुधरेगा ননলয हम बदलेंगे, युग बदलेगा IShantikunj Rishi Chintan awgpofficial wwwagporg Shantikun] Video Iulig A1ulutg - ShareChat
##जय मां गायत्री जय गुरुवर
#जय मां गायत्री जय गुरुवर - हरि शरणं हम जो बोते हैं, वही काटते हैं, विश्वास रखें कि यदि आपकी नीयत साफ है, तो ईश्वर आपका हाथ कभी नहीं छोड़ेंगे , इसलिए प्रसन्न रहिए, क्योंकि आपके पास वह ईश्वर है जो बिना बोले भी सब कुछ सुनता है। सभी प्रभु प्रेमियों को सुबह की राम राम हरि शरणं हम जो बोते हैं, वही काटते हैं, विश्वास रखें कि यदि आपकी नीयत साफ है, तो ईश्वर आपका हाथ कभी नहीं छोड़ेंगे , इसलिए प्रसन्न रहिए, क्योंकि आपके पास वह ईश्वर है जो बिना बोले भी सब कुछ सुनता है। सभी प्रभु प्रेमियों को सुबह की राम राम - ShareChat
##जय मां गायत्री जय गुरुवर
#जय मां गायत्री जय गुरुवर - सच्चे मित्र का चुनाव  मित्र तथा उत्तम पड़ोसी का चुनाव बड़ा कठिन है। अनेक  व्यक्ति आपसे अपना निकालने के स्वार्थमय उद्देश्य से IH मित्रता करने को उतावले रहते हैं, किंतु अपना कार्य निकल  जाने पर कोई सहायता नहीं करते। अतः बड़ी सावधानी से व्यक्ति का चरित्र, आदतें संग॰ शिक्षा इत्यादि का निश्चय करके मित्र का चुनाव होना चाहिए। आपका मित्र उदार, बुद्धिमान् और सत्यपरायण होना चाहिए। विश्वासपात्र मित्र जीवन पुरुषार्थी की एक औषधि है। हमें अपने मित्रों से यह आशा करनी चाहिए ೫ ೯್ಠ್ ' कि॰वे हमारे उत्तम संकल्पों करेंगे, दोषों एवं त्रुटियों से बचाएँगे तथा हमारी सत्यता, पवित्रता और मर्यादा को पुष्ट करेंगे । ೫೯ ೯7 पर पाँव रखेंगे, तब हमें सचेत करेंगे। सच्चा कुमार्ग मित्र एक पथप्रदर्शक, विश्वास-पात्र और सच्ची सहानुभूति से पूर्ण होना चाहिए। यह कर्त्तव्य उसी से पूर्ण होगा, जो दृढ़- चित्त और सत्य- संकल्प का हो। हमें ऐसे ही मित्रों का पल्ला पकड़ना चाहिए जिनमें आत्मबल हो, जैसे सुग्रीव ने राम का पल्ला पकड़ा 1 मित्र हों तो प्रतिष्ठित और शुद्ध हृदय के हों॰ मृदुल पुरुषार्थी हों॰ शिष्ट और सत्यनिष्ठ हों॰ जिससे हम अपने उनके भरोसे पर छोड़ सकें और यह विश्वास कर सकें किसी प्रकार का धोखा न होगा। मित्रता एक नई হাকি की योजना है। ज्योति जनवरी १९५१ पृष्ठ २१  సUకా सच्चे मित्र का चुनाव  मित्र तथा उत्तम पड़ोसी का चुनाव बड़ा कठिन है। अनेक  व्यक्ति आपसे अपना निकालने के स्वार्थमय उद्देश्य से IH मित्रता करने को उतावले रहते हैं, किंतु अपना कार्य निकल  जाने पर कोई सहायता नहीं करते। अतः बड़ी सावधानी से व्यक्ति का चरित्र, आदतें संग॰ शिक्षा इत्यादि का निश्चय करके मित्र का चुनाव होना चाहिए। आपका मित्र उदार, बुद्धिमान् और सत्यपरायण होना चाहिए। विश्वासपात्र मित्र जीवन पुरुषार्थी की एक औषधि है। हमें अपने मित्रों से यह आशा करनी चाहिए ೫ ೯್ಠ್ ' कि॰वे हमारे उत्तम संकल्पों करेंगे, दोषों एवं त्रुटियों से बचाएँगे तथा हमारी सत्यता, पवित्रता और मर्यादा को पुष्ट करेंगे । ೫೯ ೯7 पर पाँव रखेंगे, तब हमें सचेत करेंगे। सच्चा कुमार्ग मित्र एक पथप्रदर्शक, विश्वास-पात्र और सच्ची सहानुभूति से पूर्ण होना चाहिए। यह कर्त्तव्य उसी से पूर्ण होगा, जो दृढ़- चित्त और सत्य- संकल्प का हो। हमें ऐसे ही मित्रों का पल्ला पकड़ना चाहिए जिनमें आत्मबल हो, जैसे सुग्रीव ने राम का पल्ला पकड़ा 1 मित्र हों तो प्रतिष्ठित और शुद्ध हृदय के हों॰ मृदुल पुरुषार्थी हों॰ शिष्ट और सत्यनिष्ठ हों॰ जिससे हम अपने उनके भरोसे पर छोड़ सकें और यह विश्वास कर सकें किसी प्रकार का धोखा न होगा। मित्रता एक नई হাকি की योजना है। ज्योति जनवरी १९५१ पृष्ठ २१  సUకా - ShareChat