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##जय मां गायत्री जय गुरुवर
#जय मां गायत्री जय गुरुवर - रादचिन्तन का ०४ १०२६ १२ 3( आसि्तिकता अनन्त शांति जेननी र | ज्लाँ आरित्तकता होगी अशंतति का कोई चिन्ह द्ृष्टि ozi aి जोचर न हौना | నోq( oT सच्चा   िश्वासी पवित्र अन्तःकेण का हेत   ह्रै, तदेबुसर उसके व्यवहार तथा केर्तपरिपाक भी सुनधुर ही होते हैं। 3/003 5ফীমি-সসল R৫4০ C ?? WhatsApp - 8439014110 Shantikunj हम सुधरेंगे, युग सुधरेगा हम बदलेंगे, युग बदलेगा Shantikunj Rishi Chintan awgpgfficial wwwawgporg Shantikun] Video Iulig A1ulutg रादचिन्तन का ०४ १०२६ १२ 3( आसि्तिकता अनन्त शांति जेननी र | ज्लाँ आरित्तकता होगी अशंतति का कोई चिन्ह द्ृष्टि ozi aి जोचर न हौना | నోq( oT सच्चा   िश्वासी पवित्र अन्तःकेण का हेत   ह्रै, तदेबुसर उसके व्यवहार तथा केर्तपरिपाक भी सुनधुर ही होते हैं। 3/003 5ফীমি-সসল R৫4০ C ?? WhatsApp - 8439014110 Shantikunj हम सुधरेंगे, युग सुधरेगा हम बदलेंगे, युग बदलेगा Shantikunj Rishi Chintan awgpgfficial wwwawgporg Shantikun] Video Iulig A1ulutg - ShareChat
##जय मां गायत्री जय गुरुवर
#जय मां गायत्री जय गुरुवर - নিনাবধ 22 = अपने दोष पर थोपने से दूसरों न चलेगा| हमारी शारीरिक काम সানমিক্ধ বনলনা্সী' ক   লিব उत्तरदायी नर्हीं वरन हम स्वयं ही व्यक्तियों, परिस्थितियों एवं प्रारब्ध भोगों ಕ1 प्रभाव होता है। पर तीन चौथाई जीवन हमारे आज के दृष्टिकोण एवं कर्त्तव्य का प्रतिफल होता है। अपने को মুখানে 4 پ हाथ में लेकर हम का काम शारीरिक और मानसिक परेशानियों आसानी से हल कर सकते हैं। प्रभाव उनका नर्हीं पडता जो बकवास तो बहुत करते हैँ, पर स्वयं उस ढाँचे में ढलते नहीं| जिन्होंने चिंतन और चरित्र का समन्वय अपने जीवनक्रम में किया है उनकी सेवा साधना सदा फलती - फूलती रहती है। हारिए न हिम्मत /२३ নিনাবধ 22 = अपने दोष पर थोपने से दूसरों न चलेगा| हमारी शारीरिक काम সানমিক্ধ বনলনা্সী' ক   লিব उत्तरदायी नर्हीं वरन हम स्वयं ही व्यक्तियों, परिस्थितियों एवं प्रारब्ध भोगों ಕ1 प्रभाव होता है। पर तीन चौथाई जीवन हमारे आज के दृष्टिकोण एवं कर्त्तव्य का प्रतिफल होता है। अपने को মুখানে 4 پ हाथ में लेकर हम का काम शारीरिक और मानसिक परेशानियों आसानी से हल कर सकते हैं। प्रभाव उनका नर्हीं पडता जो बकवास तो बहुत करते हैँ, पर स्वयं उस ढाँचे में ढलते नहीं| जिन्होंने चिंतन और चरित्र का समन्वय अपने जीवनक्रम में किया है उनकी सेवा साधना सदा फलती - फूलती रहती है। हारिए न हिम्मत /२३ - ShareChat
##जय मां गायत्री जय गुरुवर
#जय मां गायत्री जय गुरुवर - धर्मार्थकाममोक्षाणाम् आरोग्यं मूलमुत्तमम् ( चरकसंहिता सूत्रस्थानम् - १.१४ धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष का मूल (जड़) उत्तम आरोग्य ही है। Sanskritkauday धर्मार्थकाममोक्षाणाम् आरोग्यं मूलमुत्तमम् ( चरकसंहिता सूत्रस्थानम् - १.१४ धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष का मूल (जड़) उत्तम आरोग्य ही है। Sanskritkauday - ShareChat
##जय मां गायत्री जय गुरुवर
#जय मां गायत्री जय गुरुवर - आपका चरित्र ही आर्पकी पहचौन हैँ। Your character is your identity true पंडित श्री राम शर्मा आचार्य ऊ आपका चरित्र ही आर्पकी पहचौन हैँ। Your character is your identity true पंडित श्री राम शर्मा आचार्य ऊ - ShareChat
##जय मां गायत्री जय गुरुवर
#जय मां गायत्री जय गुरुवर - ईश्वरीय सत्ता का तत्त्वन्ज्ञान खुशामदपसंद नहीं | किसी की निंदा-स्तुति की परमात्मा उसे आवश्यकता नहीं वह किसी पर प्रसन्न, अप्रसन्न नहीं होता| पूजा - उपासना एक प्रकार का आध्यात्मिक व्यायाम है, EdTTTT जिसके करने से हमारा आत्मबल बढ़ता है, की मात्रा में वृद्धि होती है | ईश्वर को सर्वव्यापक समझने वाला पापों से कोतवाल सामने खडा हो, तो चोर प्रकृति का मनुष्य  डरेगा भी उस समय साधु -सा आचरण करता है । सबसे बड़े कोतवाल  ईश्वर को जो अपने अंदर- बाहर चारों ओर व्यापक देखता है, वह उसके दंड से डरेगा और पाप न कर सकेगा | प्राणीमात्र में ईश्वर को व्यापक देखने वाला व्यक्ति ही सबके साथ अच्छा व्यवहार कर सकता है ईश्वरीय दृष्टि प्राप्त करना, ईश्वर की आराधना का 6 प्रधान उद्देश्य है। ध्यान, प्रार्थना, पूजा, कीर्तन, जप आदि ऐसी  मनोवैज्ञानिक क्रियाएँ हैं, जिनके द्वारा मनोभूमि में चिपके हुए अनेक कुसंस्कार छूटते हैं और उनके स्थान पर सुसंस्कारों की स्थापना होती है। यदि उस अंतरात्मा की पुकार को सुना जाए॰ उसके संकेतों पर चला जाए तो बुरे-से-बुरा मनुष्य भी थोड़े ही समय में श्रेष्ठतम महात्मा बन सकता है। गीता में भगवान ने छोड़ मेरी शरण में आ, मैं तुझे सब पापों -*44 कहा है कि- से मुक्त कर दूँगा । ' मेरी शरण अर्थात् अंतरात्मा की शरण | -अखण्ड ज्योति फरवरी १९५१ पृष्ठ ५ ईश्वरीय सत्ता का तत्त्वन्ज्ञान खुशामदपसंद नहीं | किसी की निंदा-स्तुति की परमात्मा उसे आवश्यकता नहीं वह किसी पर प्रसन्न, अप्रसन्न नहीं होता| पूजा - उपासना एक प्रकार का आध्यात्मिक व्यायाम है, EdTTTT जिसके करने से हमारा आत्मबल बढ़ता है, की मात्रा में वृद्धि होती है | ईश्वर को सर्वव्यापक समझने वाला पापों से कोतवाल सामने खडा हो, तो चोर प्रकृति का मनुष्य  डरेगा भी उस समय साधु -सा आचरण करता है । सबसे बड़े कोतवाल  ईश्वर को जो अपने अंदर- बाहर चारों ओर व्यापक देखता है, वह उसके दंड से डरेगा और पाप न कर सकेगा | प्राणीमात्र में ईश्वर को व्यापक देखने वाला व्यक्ति ही सबके साथ अच्छा व्यवहार कर सकता है ईश्वरीय दृष्टि प्राप्त करना, ईश्वर की आराधना का 6 प्रधान उद्देश्य है। ध्यान, प्रार्थना, पूजा, कीर्तन, जप आदि ऐसी  मनोवैज्ञानिक क्रियाएँ हैं, जिनके द्वारा मनोभूमि में चिपके हुए अनेक कुसंस्कार छूटते हैं और उनके स्थान पर सुसंस्कारों की स्थापना होती है। यदि उस अंतरात्मा की पुकार को सुना जाए॰ उसके संकेतों पर चला जाए तो बुरे-से-बुरा मनुष्य भी थोड़े ही समय में श्रेष्ठतम महात्मा बन सकता है। गीता में भगवान ने छोड़ मेरी शरण में आ, मैं तुझे सब पापों -*44 कहा है कि- से मुक्त कर दूँगा । ' मेरी शरण अर्थात् अंतरात्मा की शरण | -अखण्ड ज्योति फरवरी १९५१ पृष्ठ ५ - ShareChat
##जय मां गायत्री जय गुरुवर
#जय मां गायत्री जय गुरुवर - जय कर्मा मां Kutumb মনিনায बड़े बुज़ुर्गों का अनुभव वो दीया है जिससे आप अपना जीवन उज्जवल कर सकते हैं | जय कर्मा मां Kutumb মনিনায बड़े बुज़ुर्गों का अनुभव वो दीया है जिससे आप अपना जीवन उज्जवल कर सकते हैं | - ShareChat
##जय मां गायत्री जय गुरुवर
#जय मां गायत्री जय गुरुवर - हरि शरणं मुदाकरात्तमोदकं सदा विमुक्तिसाधकं कलाधरावतंसकं विलासिलोक रक्षकम् (గెక్డె) में सदा आनंद देने वाला मोदक जिनके हाथों रहता है, जो मुक्ति के मार्ग को सिद्ध करने वाले हैं, जिन्होंने अपने मस्तक पर चंद्रमा को धारण किया है और जो इस समस्त जगत के रक्षक हैं॰ मैं उन्हें नमन करता हूँ। हरि शरणं मुदाकरात्तमोदकं सदा विमुक्तिसाधकं कलाधरावतंसकं विलासिलोक रक्षकम् (గెక్డె) में सदा आनंद देने वाला मोदक जिनके हाथों रहता है, जो मुक्ति के मार्ग को सिद्ध करने वाले हैं, जिन्होंने अपने मस्तक पर चंद्रमा को धारण किया है और जो इस समस्त जगत के रक्षक हैं॰ मैं उन्हें नमन करता हूँ। - ShareChat
##जय मां गायत्री जय गुरुवर
#जय मां गायत्री जय गुरुवर - गायतीतीर्थ शान्तिकुञ्ज  साहस, सदाचार आदि नैतिक सद्गुण, कठिनाइयों से विमुख होते ही पलायन कर तब फिर व्यक्तित्व के जाते हैं, विकास का मार्ग अवरुद्ध होना ৪ী নিিবন মানিয়1 अखण्ड ज्योति १९६४ अप्रैल हम बदलेंगे - युग बदलेगा , हम सुधरेंगे - युग सुधरेगा वंदनीया माताजी की जन्म शताब्दी எப 1926 ` 2026 . दिव्य प्रकाश का महापर्व २०२६ awgpofficial YOU TUBB Shantikunj Rishi Chintan WWW.awgp.urg' 8439014110 गायतीतीर्थ शान्तिकुञ्ज  साहस, सदाचार आदि नैतिक सद्गुण, कठिनाइयों से विमुख होते ही पलायन कर तब फिर व्यक्तित्व के जाते हैं, विकास का मार्ग अवरुद्ध होना ৪ী নিিবন মানিয়1 अखण्ड ज्योति १९६४ अप्रैल हम बदलेंगे - युग बदलेगा , हम सुधरेंगे - युग सुधरेगा वंदनीया माताजी की जन्म शताब्दी எப 1926 ` 2026 . दिव्य प्रकाश का महापर्व २०२६ awgpofficial YOU TUBB Shantikunj Rishi Chintan WWW.awgp.urg' 8439014110 - ShareChat
##जय मां गायत्री जय गुरुवर
#जय मां गायत्री जय गुरुवर - भवेद्यस्मिन्नजस्र ब्रह्यचिन्तनम् 0 सुखेनैव ' आसने तद्विजानीयान्नेतरत्सुखनाशनमू ०११२ 0 ९भगवदुपादाचार्य आदि शकराचार्य द्वारा रचित अपरोक्षानुभूति " शारीरिक मुद्रा नहीं, बल्कि वहु स्थिर केवल वास्तविक आसन और सुखद : अवस्था है जिसमें निरन्तर ब्रह्मुचिन्तन सहुज रूप से सम्भव ह्य। भगवदूपादु आदि शंकराचार्य के अनुसार वह्ी श्रेष्ठ हैजो आल्मचिन्तन और अन्तःशान्ति में सह्यायक आसन ह्वयीःशेष सब केवल चित्तविक्षेप के कारण हैं । This verse teaches that true asana is not] meelyaphysical posture butanysteady andcomfortablestatethatallows uninterrupted contemplation of BrahmanAdi Shankaracharya thus defines asana as that which supports effortless spiritual absorption;allelseonly disturbs inner peace जूनापीठाधीश्वर आचार्यमहामण्डलेश्वर स्वामी अवधेशानन्द गिरि जी महयाराज AvdheshanandG AvdheshaandG_Oficia भवेद्यस्मिन्नजस्र ब्रह्यचिन्तनम् 0 सुखेनैव ' आसने तद्विजानीयान्नेतरत्सुखनाशनमू ०११२ 0 ९भगवदुपादाचार्य आदि शकराचार्य द्वारा रचित अपरोक्षानुभूति " शारीरिक मुद्रा नहीं, बल्कि वहु स्थिर केवल वास्तविक आसन और सुखद : अवस्था है जिसमें निरन्तर ब्रह्मुचिन्तन सहुज रूप से सम्भव ह्य। भगवदूपादु आदि शंकराचार्य के अनुसार वह्ी श्रेष्ठ हैजो आल्मचिन्तन और अन्तःशान्ति में सह्यायक आसन ह्वयीःशेष सब केवल चित्तविक्षेप के कारण हैं । This verse teaches that true asana is not] meelyaphysical posture butanysteady andcomfortablestatethatallows uninterrupted contemplation of BrahmanAdi Shankaracharya thus defines asana as that which supports effortless spiritual absorption;allelseonly disturbs inner peace जूनापीठाधीश्वर आचार्यमहामण्डलेश्वर स्वामी अवधेशानन्द गिरि जी महयाराज AvdheshanandG AvdheshaandG_Oficia - ShareChat
##जय मां गायत्री जय गुरुवर
#जय मां गायत्री जय गुरुवर - Shantikunj WhatsApp 8439014110 लिंची दार्शनिक चीन ಹ چ प्रसिद्ध कन्फ्यूशियस समकालीन थे और उनके सम्मान के पात्र भी।वे सदा कहा करते थे सिर्फ लिंची कीं प्रार्थनाएँ सुनता है। कौतूहलंवश कि भगवान कन्फ्यूशियस का एक शिष्य लिंची से मिलने पहुँचा । उसने लिंची से उनकी दिनचर्या के विषय में पूछा लिंची हँसे और बोले- मैं किसान हूँ ।दिन खेत में गुजर जाता है।जब भूख लगती है, साथारण खा लेता हूँ ।जब नींद आती है तो सो जाता हूँ । भगवान की अलग से प्रार्थना क्या करनीं - यह सब तो उसी का है , उसी को अर्पित है। शिष्य यह सुन कर बड़ा निराश हुआ " उसने यह घटना कन्फ्यूशियस को सुनाई। कन्फ्यूशियस बोले- वत्स! जिसका जीवन ही भगवान की प्रार्थना बन गया हो, उसे अलग से आडंबर करने की क्या आवश्यकता है। सच्चा भक्त परमात्मा को अंतरात्मा से पुकारता है, बाहर के साधनों से नहीं |शिष्य की समझ में आ गया कि भक्ति का मर्म अंतर्मन की सच्ची पुकार में है, बाह्य कलेवरों में 767/ Youlube Shantikunj Rishi Chintan  Shantikunj WhatsApp 8439014110 लिंची दार्शनिक चीन ಹ چ प्रसिद्ध कन्फ्यूशियस समकालीन थे और उनके सम्मान के पात्र भी।वे सदा कहा करते थे सिर्फ लिंची कीं प्रार्थनाएँ सुनता है। कौतूहलंवश कि भगवान कन्फ्यूशियस का एक शिष्य लिंची से मिलने पहुँचा । उसने लिंची से उनकी दिनचर्या के विषय में पूछा लिंची हँसे और बोले- मैं किसान हूँ ।दिन खेत में गुजर जाता है।जब भूख लगती है, साथारण खा लेता हूँ ।जब नींद आती है तो सो जाता हूँ । भगवान की अलग से प्रार्थना क्या करनीं - यह सब तो उसी का है , उसी को अर्पित है। शिष्य यह सुन कर बड़ा निराश हुआ " उसने यह घटना कन्फ्यूशियस को सुनाई। कन्फ्यूशियस बोले- वत्स! जिसका जीवन ही भगवान की प्रार्थना बन गया हो, उसे अलग से आडंबर करने की क्या आवश्यकता है। सच्चा भक्त परमात्मा को अंतरात्मा से पुकारता है, बाहर के साधनों से नहीं |शिष्य की समझ में आ गया कि भक्ति का मर्म अंतर्मन की सच्ची पुकार में है, बाह्य कलेवरों में 767/ Youlube Shantikunj Rishi Chintan - ShareChat