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##जय मां गायत्री जय गुरुवर
#जय मां गायत्री जय गुरुवर - गायत्री साधना के कुछ विशेष प्रयोग गायत्री सर्वोपरि मन्त्र है।गायत्री साधना के असंख्य प्रकार हैं , जिसका वर्णन यहाँ संभव नहीं है। कुछ विशेष प्रयोजनों के लिए कुछ विशेष प्रयोग दिये जा 288 (१) रोग निवारण- स्वयं रोगी होने पर मन ही मन गायत्री का जप चाहिये एक मन्त्र समाप्त होने और दूसरा cpral आरम्भ होने के बीच में एक `बीज मन्त्र 9রলনা रोगों में एं बीज मन्त्र चाहिये | सर्दी प्रधान (फ५  गर्मी प्रधान पित्त' रोगों में ऐं॰, अपच एवं विष रोगों   में बीज मन्त्र का प्रयोग সঘান (বান) 5 करना चाहिए | निरोग होने के कारण वृषभ वाहिनी हरित वस्त्र वाली का ध्यान करना चाहिए | गायत्री को निरोग करने के लिए भी इन्हीं बीज मन्त्रों का और इसी दूसरों घ्यान का प्रयोग करना चाहिए | रोगी के पीडित अंगों पर उपरोक्त ध्यान और करते U ক্রিহানা; छिड़कना  अभिमन्त्रित करके रोगी पर मार्जन देना एवं हुए हाथ U C चाहिए (२ ) बुद्धि वृद्धि, मन्द बुद्धि और स्मरण शक्ति बढ़ाने केलिए- सूर्योदय की प्रथम किरणें , से भीगे हुये मस्तक पानी पड़ने दें | पूर्व की ओर मुख करके अधखुले नेत्रों पर से सूर्य का दर्शन करते हुए तीननचार बार ऊँ का उच्चारण करने के बाद गायत्री मन्त्र की कम से कम करने के एक माला (१०८ मन्त्र अवश्य जपें பபு सूर्य की ओर করী বথলী ক্রা সাঠা बादमे दोनों ভাথা ताप रहे हैं। इस प्रकार करें माता आग इस பு- চথলিত্রী ক্রী 3া9ম ম स्थिति में १२ ಚc3 অতন नासिका , ग्रीवा, कर्ण, रगडना चाहिये और हाथों मुख 6 Sc 37 C1 आदि समस्त सिर के भागों पर फिराना चाहिए मरतक गायत्री साधना के कुछ विशेष प्रयोग गायत्री सर्वोपरि मन्त्र है।गायत्री साधना के असंख्य प्रकार हैं , जिसका वर्णन यहाँ संभव नहीं है। कुछ विशेष प्रयोजनों के लिए कुछ विशेष प्रयोग दिये जा 288 (१) रोग निवारण- स्वयं रोगी होने पर मन ही मन गायत्री का जप चाहिये एक मन्त्र समाप्त होने और दूसरा cpral आरम्भ होने के बीच में एक `बीज मन्त्र 9রলনা रोगों में एं बीज मन्त्र चाहिये | सर्दी प्रधान (फ५  गर्मी प्रधान पित्त' रोगों में ऐं॰, अपच एवं विष रोगों   में बीज मन्त्र का प्रयोग সঘান (বান) 5 करना चाहिए | निरोग होने के कारण वृषभ वाहिनी हरित वस्त्र वाली का ध्यान करना चाहिए | गायत्री को निरोग करने के लिए भी इन्हीं बीज मन्त्रों का और इसी दूसरों घ्यान का प्रयोग करना चाहिए | रोगी के पीडित अंगों पर उपरोक्त ध्यान और करते U ক্রিহানা; छिड़कना  अभिमन्त्रित करके रोगी पर मार्जन देना एवं हुए हाथ U C चाहिए (२ ) बुद्धि वृद्धि, मन्द बुद्धि और स्मरण शक्ति बढ़ाने केलिए- सूर्योदय की प्रथम किरणें , से भीगे हुये मस्तक पानी पड़ने दें | पूर्व की ओर मुख करके अधखुले नेत्रों पर से सूर्य का दर्शन करते हुए तीननचार बार ऊँ का उच्चारण करने के बाद गायत्री मन्त्र की कम से कम करने के एक माला (१०८ मन्त्र अवश्य जपें பபு सूर्य की ओर করী বথলী ক্রা সাঠা बादमे दोनों ভাথা ताप रहे हैं। इस प्रकार करें माता आग इस பு- চথলিত্রী ক্রী 3া9ম ম स्थिति में १२ ಚc3 অতন नासिका , ग्रीवा, कर्ण, रगडना चाहिये और हाथों मुख 6 Sc 37 C1 आदि समस्त सिर के भागों पर फिराना चाहिए मरतक - ShareChat