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#आज का मंत्र
आज का मंत्र - आज का मंत्र लभेत् सिकतासु तैलम् अपि यत्नतः पीडयन् पिबेत् च मृग ्तृष्णिकासु सलिलं पिपासा आर्दितः, कदाचित् अपि पर्यटन् शश विषाणम् आसादयेत्, न तु प्रतिनिविष्टमूर्खजनचित्तमाराधयेत् भावार्थः प्रयास से बालू से तेल निकाला जा सकता कठिन है, प्यासा व्यक्ति मृगतृष्णा ( मरीचिका ) में पानी पी सकता है, और घूमते हुए खरगोश के सींग भी मिल सकते है॰ लेकिन दुराग्रही मूर्ख व्यक्ति के मन को प्रसन्न करना असंभव है। ஈfR @myquote आज का मंत्र लभेत् सिकतासु तैलम् अपि यत्नतः पीडयन् पिबेत् च मृग ्तृष्णिकासु सलिलं पिपासा आर्दितः, कदाचित् अपि पर्यटन् शश विषाणम् आसादयेत्, न तु प्रतिनिविष्टमूर्खजनचित्तमाराधयेत् भावार्थः प्रयास से बालू से तेल निकाला जा सकता कठिन है, प्यासा व्यक्ति मृगतृष्णा ( मरीचिका ) में पानी पी सकता है, और घूमते हुए खरगोश के सींग भी मिल सकते है॰ लेकिन दुराग्रही मूर्ख व्यक्ति के मन को प्रसन्न करना असंभव है। ஈfR @myquote - ShareChat