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#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana
satnam waheguru ji - कउन बसत्नु आईहेरैर्संग्ताा लपटि रहिओ रसि लौथी खर्नगता ম নয जब तू इस दुनिया में आया था॰तो तेरे हे भाई! सोच साथ कौन सी वस्तु आई थी? कुछ भी नहीं। फिरतू भिखारी इन सांसारिक चीजों को अपनी जागीर क्यों समझ बैठा है? जैसे एक पतंगा दीयेकी लौके रस यानी 13 चमक के लोभ में उससे लिपटजाता है औरअंत में खुद को जला बैठता है॰ वैसे ही इंसान भी माया के पहाडा इन झूठे रसों और स्वादों में लिपटा हुआ है। यह নাল लोभ उसे आत्मिक रूप से नष्ट कर रहा है। गुरुजी हमें याद दिला रहे हैं किन हम कुछ साथ लाए थे, न बाबा कुछ साथ ले जाएंगे। इसलिएजो आज हमारे पास है ٨ औरजो आज हमारे साथ घट रहा है॰ उसे उसकी दाति को उसकी देन समझकर स्वीकार कखने में ही असली सुख है। कउन बसत्नु आईहेरैर्संग्ताा लपटि रहिओ रसि लौथी खर्नगता ম নয जब तू इस दुनिया में आया था॰तो तेरे हे भाई! सोच साथ कौन सी वस्तु आई थी? कुछ भी नहीं। फिरतू भिखारी इन सांसारिक चीजों को अपनी जागीर क्यों समझ बैठा है? जैसे एक पतंगा दीयेकी लौके रस यानी 13 चमक के लोभ में उससे लिपटजाता है औरअंत में खुद को जला बैठता है॰ वैसे ही इंसान भी माया के पहाडा इन झूठे रसों और स्वादों में लिपटा हुआ है। यह নাল लोभ उसे आत्मिक रूप से नष्ट कर रहा है। गुरुजी हमें याद दिला रहे हैं किन हम कुछ साथ लाए थे, न बाबा कुछ साथ ले जाएंगे। इसलिएजो आज हमारे पास है ٨ औरजो आज हमारे साथ घट रहा है॰ उसे उसकी दाति को उसकी देन समझकर स्वीकार कखने में ही असली सुख है। - ShareChat