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गज़ल #✒ शायरी
✒ शायरी - अंजुम ख़लीक़ गज़ल कहाँ तक और इस दुनिया से डरते ही चले जाना बस अब हम से नहीं होता मुकरते ही चले जाना मैं अब तो शहर में इस बात से पहचाना जाता हूँ গীয়   কনে  ৪ী   বল ज़िक्र तुम्हारा करना जाना यहाँ आँसू ही आँसू हैं कहाँ  तक अश्क   पोँछोगे নুস ওম বলী ম तो गुज़रते ही चले जाना गुज़रो मिरी ख़ातिर सेये इक ज़ख़्म जो मिट्टी ने खाया है ज़रा   कुछ और ठहरो इस के भरते ही चले जाना বক্কা-না-সাপা লীগী ম মিলনা মী অতিমন ঔ हुए  ऐसे तो इस दिल से उतरते ही॰ चले जाना Want Motivational Vicleos /oo अंजुम ख़लीक़ गज़ल कहाँ तक और इस दुनिया से डरते ही चले जाना बस अब हम से नहीं होता मुकरते ही चले जाना मैं अब तो शहर में इस बात से पहचाना जाता हूँ গীয়   কনে  ৪ী   বল ज़िक्र तुम्हारा करना जाना यहाँ आँसू ही आँसू हैं कहाँ  तक अश्क   पोँछोगे নুস ওম বলী ম तो गुज़रते ही चले जाना गुज़रो मिरी ख़ातिर सेये इक ज़ख़्म जो मिट्टी ने खाया है ज़रा   कुछ और ठहरो इस के भरते ही चले जाना বক্কা-না-সাপা লীগী ম মিলনা মী অতিমন ঔ हुए  ऐसे तो इस दिल से उतरते ही॰ चले जाना Want Motivational Vicleos /oo - ShareChat