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सबद नानक देव #संतो की रचनायें
संतो की रचनायें - सबद' सब कछु जीवितकौ ब्यौहार। मातु-पिता, भाई-सुत बांधव, गृहकी नारि।। gf 3 तनतें प्रान होत जब न्यारे टेरत प्रेत पुकार। आध घरी को नहिं राखै, ঘতন নন নিব্দাৎ Il मृग तृस्ना ज्यों जग रचना यह देखौ ह्रदै बिचार। कह नानक, भजु रामनाम नित, जातें होत उधार।। (नानक देव) Motivational Videos App Want . सबद' सब कछु जीवितकौ ब्यौहार। मातु-पिता, भाई-सुत बांधव, गृहकी नारि।। gf 3 तनतें प्रान होत जब न्यारे टेरत प्रेत पुकार। आध घरी को नहिं राखै, ঘতন নন নিব্দাৎ Il मृग तृस्ना ज्यों जग रचना यह देखौ ह्रदै बिचार। कह नानक, भजु रामनाम नित, जातें होत उधार।। (नानक देव) Motivational Videos App Want . - ShareChat