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#❤️जीवन की सीख #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #🙏गीता ज्ञान🛕 #श्रीमद भगवद्गीता #🙏 प्रेरणादायक विचार
❤️जीवन की सीख - 74 347 एवमुक्त्वा तता   राजन्महायोगेश्वरो ೯ೆಗ: रूपमैश्वरम् I दर्शयामास पार्थाय परमं संजय बौले  ्हे राजन्! महायोगेश्वर और सब पापोंके नाश करनेवाले भगवानूने इस प्रकार कहकर उसके पश्चात् अर्जुनको परम ऐश्वर्ययुक्त दिव्यस्वरूप दिखलाया II ९ १I अनेकवक्त्रनयनमनेकाद्धुतदर्शनम् अनेकदिव्याभरणं   दिव्यानेकोद्यतायुधम् I। दिव्यमाल्याम्बरधरं दिव्यगन्धानुलेपनम् 1 सर्वाश्चर्यमयं fa?Tairg@qi देवमनन्तं अनेक मुख और नेत्रोंसे युक्त, अनेक अद्त दर्शनोंवाले, बहुत-सै दिव्य भूपणौँसे युक्त और बहुत- से दिव्य शस्त्रोंको हाथौंमें उठाये हुए दिव्य माला और वस्त्रोंको धारण किये हुए और दिव्य गन्धका सारे शरोरमैं लेप किये हुए॰ सब प्रकारके आश्चर्योंसे युक्त, सीमारहित और सब ओर मुख किये हुए विराट्- अर्जुनने देखा स्वरूप परमदेव परमेश्वरको Il ?০-?? भवेद्युगपदुत्थिता सूर्यसहस्त्रस्य fಷf यदि भाः सदृशी सा स्याद्भासस्तस्य महात्मनः १।  आकाशमैं हजार सूर्यौकै एक साथ उदय होनेसे उस   विश्वरूप 4 जो वह हा, उत्पत्न प्रकाश परमात्माके प्रकाशके सदृश कदाचित् ही हाो ।l १२ ।l तत्त्रैकस्थं  जगत्कृत्स्तं प्रचिभक्तमनेकधा | হার্যীয अपश्यद्देवदेवस्य पाण्डवस्तदा il पाण्डुपुत्र अर्जुनने उस समय अनेक प्रकारसे विभक्त अर्थात् पृथक् पृथक् सम्पूर्ण जगत्को देवॅके देव श्रीकृण्ण ~ भगवान्के उस शरौरमैं एक जगह स्थित देखा II १३ ।l श्रीमढ्भगवढ्गीता अध्याय ११ गीता प्रेस, गोरखपुर से साभार 74 347 एवमुक्त्वा तता   राजन्महायोगेश्वरो ೯ೆಗ: रूपमैश्वरम् I दर्शयामास पार्थाय परमं संजय बौले  ्हे राजन्! महायोगेश्वर और सब पापोंके नाश करनेवाले भगवानूने इस प्रकार कहकर उसके पश्चात् अर्जुनको परम ऐश्वर्ययुक्त दिव्यस्वरूप दिखलाया II ९ १I अनेकवक्त्रनयनमनेकाद्धुतदर्शनम् अनेकदिव्याभरणं   दिव्यानेकोद्यतायुधम् I। दिव्यमाल्याम्बरधरं दिव्यगन्धानुलेपनम् 1 सर्वाश्चर्यमयं fa?Tairg@qi देवमनन्तं अनेक मुख और नेत्रोंसे युक्त, अनेक अद्त दर्शनोंवाले, बहुत-सै दिव्य भूपणौँसे युक्त और बहुत- से दिव्य शस्त्रोंको हाथौंमें उठाये हुए दिव्य माला और वस्त्रोंको धारण किये हुए और दिव्य गन्धका सारे शरोरमैं लेप किये हुए॰ सब प्रकारके आश्चर्योंसे युक्त, सीमारहित और सब ओर मुख किये हुए विराट्- अर्जुनने देखा स्वरूप परमदेव परमेश्वरको Il ?০-?? भवेद्युगपदुत्थिता सूर्यसहस्त्रस्य fಷf यदि भाः सदृशी सा स्याद्भासस्तस्य महात्मनः १।  आकाशमैं हजार सूर्यौकै एक साथ उदय होनेसे उस   विश्वरूप 4 जो वह हा, उत्पत्न प्रकाश परमात्माके प्रकाशके सदृश कदाचित् ही हाो ।l १२ ।l तत्त्रैकस्थं  जगत्कृत्स्तं प्रचिभक्तमनेकधा | হার্যীয अपश्यद्देवदेवस्य पाण्डवस्तदा il पाण्डुपुत्र अर्जुनने उस समय अनेक प्रकारसे विभक्त अर्थात् पृथक् पृथक् सम्पूर्ण जगत्को देवॅके देव श्रीकृण्ण ~ भगवान्के उस शरौरमैं एक जगह स्थित देखा II १३ ।l श्रीमढ्भगवढ्गीता अध्याय ११ गीता प्रेस, गोरखपुर से साभार - ShareChat