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बचपन... #kavi #kavichaman #durgeshjaiswalchaman
kavi - 444#.., भी होतीं है बरसातें 314 अनव भी बहता है पानी अब भी होत्ा हे कोचड भी बोलते हैं मेढ़क  अब अब भी बोलते हें मोर  और होता है तरह- तरह के जीवों का शोर पर सबको अब नहीं है उससे मतलब सबकी व्यस्तताऐं अलग हैं नहीं बहाता अब कोई कागज की बनाकर नाव  नर्हीं देखने जाता कोई हरिजनों की बस्ती का जल-भराव न्हीं आता याद अब नह चौमासे का माह नहीं होता था जब लोगों के घर खाने का अन्न जब आती आती गाँन र्मे बाढ. .- केसे बहा ले जाती अपने साथ फसले जाननर पूरे  और अनेरकों स्वप्न ঘ-ন  किसको  पर याद आता है उन बच्चों को जो कभी थे छोटे हो गये हैं बूढ़े पर -अब उनको याद आता हे बचपन दुर्गेश जायसवाल चमन @durgeshjaiswalchaman 2025-09-14 444#.., भी होतीं है बरसातें 314 अनव भी बहता है पानी अब भी होत्ा हे कोचड भी बोलते हैं मेढ़क  अब अब भी बोलते हें मोर  और होता है तरह- तरह के जीवों का शोर पर सबको अब नहीं है उससे मतलब सबकी व्यस्तताऐं अलग हैं नहीं बहाता अब कोई कागज की बनाकर नाव  नर्हीं देखने जाता कोई हरिजनों की बस्ती का जल-भराव न्हीं आता याद अब नह चौमासे का माह नहीं होता था जब लोगों के घर खाने का अन्न जब आती आती गाँन र्मे बाढ. .- केसे बहा ले जाती अपने साथ फसले जाननर पूरे  और अनेरकों स्वप्न ঘ-ন  किसको  पर याद आता है उन बच्चों को जो कभी थे छोटे हो गये हैं बूढ़े पर -अब उनको याद आता हे बचपन दुर्गेश जायसवाल चमन @durgeshjaiswalchaman 2025-09-14 - ShareChat