दुर्गेश जायसवाल 'चमन'
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दुर्गेश जायसवाल 'चमन'
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लेखक, कवि (साहित्यकार)
My Instagram #kavichaman #durgeshjaiswalchaman #💝 शायराना इश्क़ #📚कविता-कहानी संग्रह #🌙 गुड नाईट @durgrshjaiswalchaman
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#durgeshjaiswalchaman #kavichaman #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #🌞 Good Morning🌞 #💝 शायराना इश्क़
durgeshjaiswalchaman - कुछ जंगें चुपचाप अकेले में अपने आप से ही लड़ लेना चाहिए क्योंकि लोगों को बताने से अंततः दर्द तुमको ही होगा !०००००० = दुर्गेश जायसवाल चमन  2025-08-12 कुछ जंगें चुपचाप अकेले में अपने आप से ही लड़ लेना चाहिए क्योंकि लोगों को बताने से अंततः दर्द तुमको ही होगा !०००००० = दुर्गेश जायसवाल चमन  2025-08-12 - ShareChat
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kavichaman - "अज्ञानी होना नहीं, बल्कि ज्ञानी का दिखावा करना शर्मनाक होने है !" 2025-08 17 "अज्ञानी होना नहीं, बल्कि ज्ञानी का दिखावा करना शर्मनाक होने है !" 2025-08 17 - ShareChat
हमारे विचार ही नये समाज के निर्माण की नीव होते है #durgeshjaiswalchaman #kavichaman #kavi
durgeshjaiswalchaman - नैतिकता और हम R थोड़ा गहनता के साथ काव्य का अध्ययन करने पर और विश्व जगत के दार्शनिकों और विचारकों को पढ़ने पर ज्ञात होता है कि इमोशनल इंटेलिजेंस से लेकर एप्टीट्यूड सत्यनिष्ठा निष्पक्षता, सामानभूति सहिष्णुता जैसे नैतिक जीवन में होता चला जाता है। फिर ऐसा लगता है का विकास हमारे मूल्यों मानो इस दुनिया की व्यर्थ बातों में क्या ही रखा है ; विश्व दार्शनिकों को पढ़ाता हूं॰ सुकरात प्लेटो अरस्तु ,कांट व जॉनराल्स जैसे दार्शनिकों को ,तो खो जाता हूं फिर आता हूं अपने भारतीय दर्शन में तो महात्मा बुद्ध के चार आर्यसत्य व अष्टांगिक मार्ग मैं निर्लप्त हो जाता हूं॰ फिर  आता है मुझको महात्मा जैन याद का वह त्रिरत्न, फिर देखता हूं शंकर के अद्वैतवादी सिद्धांत को और नब्यवेदांत जैसे दार्शनिक विचार को ।फिर देखता हूं विवेकानंद की उस  दरिद्रनारायण की अवधारणा, पढ़ता हूं गांधी और अंबेडकर के उस डिबेट को जिसमें दोनों के बीच था वह मतभेद लेकिन चाहते थे दोनों परिवर्तन ऊंच- में सुधार  नीच छुआछूत  समन्वय व सामाजिक स्थिति का। फिर देखता हूं राजा राममोहन राय और ज्योतिबा फुले जैसे सामाजिक सुधारकों को। फिर आता है मेरा मन आज के उन नेताओं और और प्रसाशकों पर जो नहीं समझते हैं अपना दायित्व अपने नैतिक मूल्य जो भ्रष्टाचार के चलते  अपनी सभी हदें पार कर जाते हैं | उनको नहीं होता तनिक भी संदेह अपनी उस करनी पर। व नई जनरेशन को जिनके जीवन में रह गया के युवा " फिर देखता हूं आज है वह 'रील' का क्षणिक सुख। फिर देखता हूं अच्छे विचार रखने वाले उन महानभावों को जिनकी नहीं होती वह कद्र फिर सोचता हूं और मुस्कुरा देता हूँ -दुर्गेश जायसवाल ' चमन नैतिकता और हम R थोड़ा गहनता के साथ काव्य का अध्ययन करने पर और विश्व जगत के दार्शनिकों और विचारकों को पढ़ने पर ज्ञात होता है कि इमोशनल इंटेलिजेंस से लेकर एप्टीट्यूड सत्यनिष्ठा निष्पक्षता, सामानभूति सहिष्णुता जैसे नैतिक जीवन में होता चला जाता है। फिर ऐसा लगता है का विकास हमारे मूल्यों मानो इस दुनिया की व्यर्थ बातों में क्या ही रखा है ; विश्व दार्शनिकों को पढ़ाता हूं॰ सुकरात प्लेटो अरस्तु ,कांट व जॉनराल्स जैसे दार्शनिकों को ,तो खो जाता हूं फिर आता हूं अपने भारतीय दर्शन में तो महात्मा बुद्ध के चार आर्यसत्य व अष्टांगिक मार्ग मैं निर्लप्त हो जाता हूं॰ फिर  आता है मुझको महात्मा जैन याद का वह त्रिरत्न, फिर देखता हूं शंकर के अद्वैतवादी सिद्धांत को और नब्यवेदांत जैसे दार्शनिक विचार को ।फिर देखता हूं विवेकानंद की उस  दरिद्रनारायण की अवधारणा, पढ़ता हूं गांधी और अंबेडकर के उस डिबेट को जिसमें दोनों के बीच था वह मतभेद लेकिन चाहते थे दोनों परिवर्तन ऊंच- में सुधार  नीच छुआछूत  समन्वय व सामाजिक स्थिति का। फिर देखता हूं राजा राममोहन राय और ज्योतिबा फुले जैसे सामाजिक सुधारकों को। फिर आता है मेरा मन आज के उन नेताओं और और प्रसाशकों पर जो नहीं समझते हैं अपना दायित्व अपने नैतिक मूल्य जो भ्रष्टाचार के चलते  अपनी सभी हदें पार कर जाते हैं | उनको नहीं होता तनिक भी संदेह अपनी उस करनी पर। व नई जनरेशन को जिनके जीवन में रह गया के युवा " फिर देखता हूं आज है वह 'रील' का क्षणिक सुख। फिर देखता हूं अच्छे विचार रखने वाले उन महानभावों को जिनकी नहीं होती वह कद्र फिर सोचता हूं और मुस्कुरा देता हूँ -दुर्गेश जायसवाल ' चमन - ShareChat
बचपन... #kavi #kavichaman #durgeshjaiswalchaman
kavi - 444#.., भी होतीं है बरसातें 314 अनव भी बहता है पानी अब भी होत्ा हे कोचड भी बोलते हैं मेढ़क  अब अब भी बोलते हें मोर  और होता है तरह- तरह के जीवों का शोर पर सबको अब नहीं है उससे मतलब सबकी व्यस्तताऐं अलग हैं नहीं बहाता अब कोई कागज की बनाकर नाव  नर्हीं देखने जाता कोई हरिजनों की बस्ती का जल-भराव न्हीं आता याद अब नह चौमासे का माह नहीं होता था जब लोगों के घर खाने का अन्न जब आती आती गाँन र्मे बाढ. .- केसे बहा ले जाती अपने साथ फसले जाननर पूरे  और अनेरकों स्वप्न ঘ-ন  किसको  पर याद आता है उन बच्चों को जो कभी थे छोटे हो गये हैं बूढ़े पर -अब उनको याद आता हे बचपन दुर्गेश जायसवाल चमन @durgeshjaiswalchaman 2025-09-14 444#.., भी होतीं है बरसातें 314 अनव भी बहता है पानी अब भी होत्ा हे कोचड भी बोलते हैं मेढ़क  अब अब भी बोलते हें मोर  और होता है तरह- तरह के जीवों का शोर पर सबको अब नहीं है उससे मतलब सबकी व्यस्तताऐं अलग हैं नहीं बहाता अब कोई कागज की बनाकर नाव  नर्हीं देखने जाता कोई हरिजनों की बस्ती का जल-भराव न्हीं आता याद अब नह चौमासे का माह नहीं होता था जब लोगों के घर खाने का अन्न जब आती आती गाँन र्मे बाढ. .- केसे बहा ले जाती अपने साथ फसले जाननर पूरे  और अनेरकों स्वप्न ঘ-ন  किसको  पर याद आता है उन बच्चों को जो कभी थे छोटे हो गये हैं बूढ़े पर -अब उनको याद आता हे बचपन दुर्गेश जायसवाल चमन @durgeshjaiswalchaman 2025-09-14 - ShareChat
#🌞 Good Morning🌞 #📚कविता-कहानी संग्रह #✍मेरे पसंदीदा लेखक #👋🏻अलविदा 2025 🥳 @writer chaman #😍न्यू ईयर : countdown Start⌛
🌞 Good Morning🌞 - क्या लिखता..., बहुत से दोस्त विछड़े तो दूर जिन्हे कभी विछडना सोंचा तक नहीं होगा। ऐसे लोगों से विश्वासघात विश्वास। जिसपर परिजनों जितना किया होगा कुछ लोगों ने तीखे व्यंग থাাযন सुनाये तरह- तरह की व्याख्याएँ लोगों से। अपनी सुनी होगी और इससे अधिक क्या हो सकता है कि परिजनों में अपने पसंदीदा लोगों को दिया हो तुमने कंधा और हृदय की घोर हताशा भी अंतर को कचोटती हुई মন बार्बार देती हो जबाब या सामना करना पड़ा हो किसी जानलेवा हमले का a& गाली गलौज तक बातें न पहुंची हों जिसर्में लड़ाई या हुम्हे मिली हो कुछ असफलताएँ 3193 గెఖా గెఖా # अनवरत मेहनत के बाद भी॰ छुपा राखी हो अपनी कलाएँ अलंकरण 377 যা और अनेक प्रतिभाएँ अपने सपनों के लिए दुर्गेश जायसवाल चमन क्या लिखता..., बहुत से दोस्त विछड़े तो दूर जिन्हे कभी विछडना सोंचा तक नहीं होगा। ऐसे लोगों से विश्वासघात विश्वास। जिसपर परिजनों जितना किया होगा कुछ लोगों ने तीखे व्यंग থাাযন सुनाये तरह- तरह की व्याख्याएँ लोगों से। अपनी सुनी होगी और इससे अधिक क्या हो सकता है कि परिजनों में अपने पसंदीदा लोगों को दिया हो तुमने कंधा और हृदय की घोर हताशा भी अंतर को कचोटती हुई মন बार्बार देती हो जबाब या सामना करना पड़ा हो किसी जानलेवा हमले का a& गाली गलौज तक बातें न पहुंची हों जिसर्में लड़ाई या हुम्हे मिली हो कुछ असफलताएँ 3193 గెఖా గెఖా # अनवरत मेहनत के बाद भी॰ छुपा राखी हो अपनी कलाएँ अलंकरण 377 যা और अनेक प्रतिभाएँ अपने सपनों के लिए दुर्गेश जायसवाल चमन - ShareChat