'जीवन एक सिलसिला'
जीवन महज एक सिलसिला है मिलने का,
अपने आप से ...
हम जितना आगे बढ़ते,पढ़ते और सीखते जाते हैं,
तो ऐसा लगता है की मानो,
अज्ञानता और बढ़ती जाती है।
सजगता सघनता ज्ञान के प्रति
और निर्लप्तता व ललक बढ़ती जाती है ।
-दुर्गेश जायसवाल 'चमन'
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