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#❤️जीवन की सीख जीवन का एक सत्य यह भी है, कि संग्रह किया गया विषाद बन जाता है और बाँटा गया प्रसाद बन जाता है।उपयोग, उपभोग और नाश शास्त्रों में धन की ये तीन गतियां बताई गई हैं। धन से जितना आप चाहो सुख के साधनों को अर्जित करो बाकी बचा धन सृजन कार्यों में, सद्कार्यों में, श्रेष्ठ कार्यों में लगे अपने जीवन का ऐसा अभ्यास बनाओ। यदि आप ऐसा नहीं कर पाते हैं तो समझ लेना फिर आपका धन नाश को प्राप्त होने वाला है। जो लोग धन का दुरूपयोग अथवा अनुपयोग करते हैं समझो वो उसका नाश ही कर रहे हैं। दुनिया आपको इसलिए याद नहीं करती कि आपके पास बड़ा धन है अपितु इसलिए याद करती है कि आपके पास बड़ा मन है और आप केवल धन का अर्जन ही नहीं करते अपितु आवश्यकता पड़ने पर विसर्जन भी करते हैं। केवल धन के अर्जन से समाज में आपका महत्व नहीं बढ़ जाता अपितु अर्जन के साथ-साथ विसर्जन ही समाज में किसी व्यक्ति को मूल्यवान एवं विशिष्ट बनाता है। 🙏जय श्री लक्ष्मीनारायण 🙏
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