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कलाम अहमद जाम #सूफी काव्य
सूफी काव्य - "कलाम ' मा गरचे बसे गुनह गारेम हम बर दर॰ए॰्तू उम्मीदवारेम हम अगरचे बहुत गुनहगार हैं लेकिन हमें तुम्हारे दर से उम्मी दें भी हैं दर कू॰एन्मलामतेम रुस्वा गर्द-ए-गुनाह एनपुर ग़ुबारेम 3گآ हम मलामत (निंद ) की गली में बदनाम फिर रहे हैं गुनाहों के गर्द-ओ ग़ुबार से हमारा दामन गंदा हो गया है दिल ख़स्तः व तन शिकस्तः बदनाम हर लहज़ः ब-चश्म ए ख़ल्क़ ख़्वारेम दिल ज़ख़्मी , बदन टूटा हुआ और माथे पर निंदा কানায়া की नज़र में हम अपमानित और बदनाम हैं दुनिया  मतऊ'न ए-ज़बान ए ख़ास ओ आ'मेम मजरूह ए सिनान एन्तान-ओ-आ'रेम दुनिया का हर व्यक्ति हमारी निंदा करता है कटाक्षों और बदनामी की बर्छियों से बदन छलनी छलनी है मा गुम शुदनान ए राह एन्इ'श्क़ेम मा सोख़्तगान ए ख़ाम ्कारेम हम इश्क़ कि राह में गुम हो चुके हैं हम ना-्समझ और दिलजले लोग हैं आख़िर निगहे ब-सू॰एनमा कुन कज़ लुत्फ़ एन्तू बस उम्मीदवारेम आख़िर हमारी तरफ़ एक निगाह तो करो हम तुम्हारी प्रेम दृष्टि ही के उम्मीदवार हैं (अहमद जाम) Motivational Videos App Want "कलाम ' मा गरचे बसे गुनह गारेम हम बर दर॰ए॰्तू उम्मीदवारेम हम अगरचे बहुत गुनहगार हैं लेकिन हमें तुम्हारे दर से उम्मी दें भी हैं दर कू॰एन्मलामतेम रुस्वा गर्द-ए-गुनाह एनपुर ग़ुबारेम 3گآ हम मलामत (निंद ) की गली में बदनाम फिर रहे हैं गुनाहों के गर्द-ओ ग़ुबार से हमारा दामन गंदा हो गया है दिल ख़स्तः व तन शिकस्तः बदनाम हर लहज़ः ब-चश्म ए ख़ल्क़ ख़्वारेम दिल ज़ख़्मी , बदन टूटा हुआ और माथे पर निंदा কানায়া की नज़र में हम अपमानित और बदनाम हैं दुनिया  मतऊ'न ए-ज़बान ए ख़ास ओ आ'मेम मजरूह ए सिनान एन्तान-ओ-आ'रेम दुनिया का हर व्यक्ति हमारी निंदा करता है कटाक्षों और बदनामी की बर्छियों से बदन छलनी छलनी है मा गुम शुदनान ए राह एन्इ'श्क़ेम मा सोख़्तगान ए ख़ाम ्कारेम हम इश्क़ कि राह में गुम हो चुके हैं हम ना-्समझ और दिलजले लोग हैं आख़िर निगहे ब-सू॰एनमा कुन कज़ लुत्फ़ एन्तू बस उम्मीदवारेम आख़िर हमारी तरफ़ एक निगाह तो करो हम तुम्हारी प्रेम दृष्टि ही के उम्मीदवार हैं (अहमद जाम) Motivational Videos App Want - ShareChat