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#☝ मेरे विचार
☝ मेरे विचार - #SufiTeaching जब महबूब का कोई निशाँ बाक़ी न रहे, तो तू भी बे-निशाँ हो जा। जैसे फूल की ख़ुशबू फूल में छिपी रहती है, वैसे ही महबूब में गुम हो जा और महबूब जैसा ही नज़र आ। -क़ाज़ी हमीदुद्दीन नागौरी రే క్డీ Sufinama  #SufiTeaching जब महबूब का कोई निशाँ बाक़ी न रहे, तो तू भी बे-निशाँ हो जा। जैसे फूल की ख़ुशबू फूल में छिपी रहती है, वैसे ही महबूब में गुम हो जा और महबूब जैसा ही नज़र आ। -क़ाज़ी हमीदुद्दीन नागौरी రే క్డీ Sufinama - ShareChat