neelam singhal
तेरे सिवा कुछ चाहिए नहीं, तो इस माया जगत में खोजूँ क्या...
संसार के नश्वर सुख के सम्मुख, तेरी भक्ति के आनंद को तोलूँ क्या...
नहीं लग रहा कुछ भी अच्छा, तेरे सिवा कुछ मैं बोलूँ क्या...
पराया है सब, यहाँ मेरा कुछ नहीं, तो अपना मैं बोलूँ क्या...
कैसे व्यक्त करूँ प्रेम-भाव तेरे लिए, सर्वज्ञ हो तुम, मैं कहूँ क्या...
कहना-सुनना कुछ नहीं, अब मैं बस पास में तेरे रो लूँ क्या...
माया जगत के दिए जो किरदार तूने, मैं स्वाँग रचा के थक गया,
अब अपनी वास्तविकता बोलूँ क्या...
सुख-दुःख मेरे सब तुमसे, हँसना-गाना ठीक है सब,
तू गले लगा ले माँ, मैं जी भर के रो लूँ क्या...
तेरा हूँ तो आ माँ, तेरी गोद में सर रख सो लूँ क्या...
भज दुर्गे 🔺❤️ #🙏कर्म क्या है❓ #🙏🏻आध्यात्मिकता😇