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#✍मेरे पसंदीदा लेखक
✍मेरे पसंदीदा लेखक - कितनी नादान थी मैं. हीरे और कांच के बीच का फर्क नहीं समझ पाई, , अपनों   के भेष में छुपे परायों को नहीं पहचान पाई...j! जो कितनी नादान थी मैं. हीरे और कांच के बीच का फर्क नहीं समझ पाई, , अपनों   के भेष में छुपे परायों को नहीं पहचान पाई...j! जो - ShareChat