ShareChat
click to see wallet page
search
#आज का मंत्र
आज का मंत्र - आज का मंत्र साहित्यसंगीतकलाविहीनः साक्षात्पशुः पुच्छविषाणहीनः तृणं न खादन्नपि जीवमानस्तद्भागधेयं परमं पशूनाम् भावार्थः जो मनुष्य साहित्य , संगीत , कला, से वंचित होता है वह बिना पूंछ तथा बिना सींगों वाले साक्षात् पशु के समान है | वह बिना घास खाए जीवित रहता है यह पशुओं के लिए निःसंदेह सौभाग्य की बात है | भर्तृहरि @myquote आज का मंत्र साहित्यसंगीतकलाविहीनः साक्षात्पशुः पुच्छविषाणहीनः तृणं न खादन्नपि जीवमानस्तद्भागधेयं परमं पशूनाम् भावार्थः जो मनुष्य साहित्य , संगीत , कला, से वंचित होता है वह बिना पूंछ तथा बिना सींगों वाले साक्षात् पशु के समान है | वह बिना घास खाए जीवित रहता है यह पशुओं के लिए निःसंदेह सौभाग्य की बात है | भर्तृहरि @myquote - ShareChat