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शेर को फैज अहमद फैज #✒ शायरी
✒ शायरी - भी दुख हैं ज़माने में 37< मोहब्बत के सिवा और भी हैं वस्ल की राहतें . राहत के सिवा फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ Sk भी दुख हैं ज़माने में 37< मोहब्बत के सिवा और भी हैं वस्ल की राहतें . राहत के सिवा फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ Sk - ShareChat