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#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana
satnam waheguru ji - गावै को साजि करे तनु खेह।।गावै को जीअ लै फिरि देह।।गावै को जापै दिसै दूरि।।गावै को वेखै हादरा 6&RiI मीठा अर्थःहे भाई! कोई परमात्मा को इस रूप में गाता है कि वह शरीर को रचता है (साजि) और अंत में उसे ( खेह ) मिट्टी कर लगे देता है। कोई उसे इस रूप में गाता है कि वही प्राणों (जीअ) को छीन लेता है और फिर से उन्हें वापस ( पुनर्जन्म) देता है। dా जीवन और मृत्यु का चक्र पूरी तरह उसी के हाथ में है।कोई उसे इस तरह गाता है जैसे वह बहुत दूर ( अगम्य ) है और उसे पाना कठिन है।कोई उसे इस रूप में गाता है कि वह भाणा हाजिर नाजिर (हादरा हदूरि) है और उसे अपने अंग संग, साक्षात देख रहा है। गुरु साहिब जी इन पंक्तियों के माध्यम से के गुण  यह समझा रहे हैं कि परमात्मा ' और उसकी शक्तियाँ इतनी विशाल हैं कि हर व्यक्ति अपनी दृष्टि और अनुभव के अनुसार उसकी महिमा करता है। कोई उसे सृष्टि का रचयिता मानता है, तो कोई उसे सर्वव्यापी मानता है। अंततःवह इन सभी गुणों से भी परे और अनंत हैl गावै को साजि करे तनु खेह।।गावै को जीअ लै फिरि देह।।गावै को जापै दिसै दूरि।।गावै को वेखै हादरा 6&RiI मीठा अर्थःहे भाई! कोई परमात्मा को इस रूप में गाता है कि वह शरीर को रचता है (साजि) और अंत में उसे ( खेह ) मिट्टी कर लगे देता है। कोई उसे इस रूप में गाता है कि वही प्राणों (जीअ) को छीन लेता है और फिर से उन्हें वापस ( पुनर्जन्म) देता है। dా जीवन और मृत्यु का चक्र पूरी तरह उसी के हाथ में है।कोई उसे इस तरह गाता है जैसे वह बहुत दूर ( अगम्य ) है और उसे पाना कठिन है।कोई उसे इस रूप में गाता है कि वह भाणा हाजिर नाजिर (हादरा हदूरि) है और उसे अपने अंग संग, साक्षात देख रहा है। गुरु साहिब जी इन पंक्तियों के माध्यम से के गुण  यह समझा रहे हैं कि परमात्मा ' और उसकी शक्तियाँ इतनी विशाल हैं कि हर व्यक्ति अपनी दृष्टि और अनुभव के अनुसार उसकी महिमा करता है। कोई उसे सृष्टि का रचयिता मानता है, तो कोई उसे सर्वव्यापी मानता है। अंततःवह इन सभी गुणों से भी परे और अनंत हैl - ShareChat