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।। ॐ ।। अपरेयमितस्त्वन्यां प्रकृतिं विद्धि मे पराम्। जीवभूतां महबाहो ययेदं धार्यते जगत्॥ 'इयम्' अर्थात् यह आठ प्रकारोंवाली तो मेरी अपरा प्रकृति है अर्थात् जड़ प्रकृति है। महाबाहु अर्जुन ! इससे दूसरी को जीवरूप 'परा' अर्थात् चेतन प्रकृति जान, जिसने सम्पूर्ण जगत् धारण किया हुआ है। वह है जीवात्मा। जीवात्मा भी प्रकृति के सम्बन्ध में रहने के कारण प्रकृति ही है #यथार्थ गीता #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🧘सदगुरु जी🙏 #❤️जीवन की सीख
यथार्थ गीता - 13 | रनितरचन्या प्रकृतिं विद्धि मे पराम्।  মুনা সননানী এমব থামন অনূIl ^37सतयह आढ प्रकारोंवाली तो मेरी नपराप्रकति हि अर्थात जड़ प्रकृति है। মচানাভ সতূুম ! ভ্রসস को जीवरूप दूसरी रा अर्थात चतनप्रकतिजान जिसने जगत धारण किया हुआ है। वह n  जीवात्मा भी प्रकृतिके सम्बन्ध केकारण प्रकृति हीह 13 | रनितरचन्या प्रकृतिं विद्धि मे पराम्।  মুনা সননানী এমব থামন অনূIl ^37सतयह आढ प्रकारोंवाली तो मेरी नपराप्रकति हि अर्थात जड़ प्रकृति है। মচানাভ সতূুম ! ভ্রসস को जीवरूप दूसरी रा अर्थात चतनप्रकतिजान जिसने जगत धारण किया हुआ है। वह n  जीवात्मा भी प्रकृतिके सम्बन्ध केकारण प्रकृति हीह - ShareChat