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#☝ मेरे विचार
☝ मेरे विचार - संपादळीय कानून ऐसे हों, जो धरातल पर अमल में लाए जा सकें शिक्षा और खाद्य सुरक्षा प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से अलग-्अलग समय और रास्तों से मौलिक अधिकार तोबने लेकिन क्या इनका वास्तविक 4 लाभ आम नागरिकों को मिला? शिक्षा महंगी और निजी हाथों जाती रही जबकि खाद्य सुरक्षा कुछ किलो मुफ्त अनाज तक सीमित हो गई। वर्तमान सरकार मनरेगा के बाद इन दोनों कानूनों में बदलाव लाकर इन्हें समयबद्ध तरीके से अमल मेँ लाना चाहती है। हाल ही मेंँ सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि समानता ೫ से शुरू होती है। कोर्ट स्कूलों फैसले के बाद ही २००२ में संविधान संशोधन करके शिक्षा एक मौलिक अधिकार बनाने के लिए अनुच्छेद २१(अ ) जोड़ा गया २००१ में शिक्षा का अधिकार कानून आया। खाद्य सुरक्षा को कोर्ट ने जीवन के अधिकार का अभिन्न अंग माना और यूपीए ಪಕ್ २०१३ में इसे कानूनी जामा पहनाया। लेकिन क्या वास्तव में गरीब का बच्चा आज वही शिक्षा पा रहा है, जो किसी उच्च वर्ग बच्चे को मिल रही है ? क्या यह सच नहीं कि आज भी कुपोषण ಕಕೆ के लिए बड़ी समस्या है और ননল मुफ्त अनाज इसका हल है? सरकार का मानना है कि इन कानूनों में बदलाव करके सबके लिए सुलभ कराने का समयबद्ध खाका होना चाहिए। ஈ क्रियान्वयन की रियल टाइम मॉनिटरिंग डिजिटल प्रक्रिया से हो। तीसरा, योजना भले सबके लिए हो लेकिन उससे कामूना ऐिसे वाले लोगों को प्राथमिकता से चिह्नित किया जाए। कानून चाहिए, जिन्हें अमल में लाना राज्यसत्ता के लिए बाध्यकारी होे। संपादळीय कानून ऐसे हों, जो धरातल पर अमल में लाए जा सकें शिक्षा और खाद्य सुरक्षा प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से अलग-्अलग समय और रास्तों से मौलिक अधिकार तोबने लेकिन क्या इनका वास्तविक 4 लाभ आम नागरिकों को मिला? शिक्षा महंगी और निजी हाथों जाती रही जबकि खाद्य सुरक्षा कुछ किलो मुफ्त अनाज तक सीमित हो गई। वर्तमान सरकार मनरेगा के बाद इन दोनों कानूनों में बदलाव लाकर इन्हें समयबद्ध तरीके से अमल मेँ लाना चाहती है। हाल ही मेंँ सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि समानता ೫ से शुरू होती है। कोर्ट स्कूलों फैसले के बाद ही २००२ में संविधान संशोधन करके शिक्षा एक मौलिक अधिकार बनाने के लिए अनुच्छेद २१(अ ) जोड़ा गया २००१ में शिक्षा का अधिकार कानून आया। खाद्य सुरक्षा को कोर्ट ने जीवन के अधिकार का अभिन्न अंग माना और यूपीए ಪಕ್ २०१३ में इसे कानूनी जामा पहनाया। लेकिन क्या वास्तव में गरीब का बच्चा आज वही शिक्षा पा रहा है, जो किसी उच्च वर्ग बच्चे को मिल रही है ? क्या यह सच नहीं कि आज भी कुपोषण ಕಕೆ के लिए बड़ी समस्या है और ননল मुफ्त अनाज इसका हल है? सरकार का मानना है कि इन कानूनों में बदलाव करके सबके लिए सुलभ कराने का समयबद्ध खाका होना चाहिए। ஈ क्रियान्वयन की रियल टाइम मॉनिटरिंग डिजिटल प्रक्रिया से हो। तीसरा, योजना भले सबके लिए हो लेकिन उससे कामूना ऐिसे वाले लोगों को प्राथमिकता से चिह्नित किया जाए। कानून चाहिए, जिन्हें अमल में लाना राज्यसत्ता के लिए बाध्यकारी होे। - ShareChat