ShareChat
click to see wallet page
search
#जय श्री राम श्री राम के जीवन और उनके उपदेशों (विशेषकर योग वशिष्ठ और मानस) के अनुसार, मन को शांत करने के लिए एक अनुशासित और आध्यात्मिक जीवन-शैली की आवश्यकता होती है। उनके अनुसार मन को शांत करने के मुख्य उपाय निम्नलिखित हैं: * मर्यादा और अनुशासन: श्री राम 'मर्यादा पुरुषोत्तम' हैं। उनका जीवन सिखाता है कि जब मनुष्य अपने कर्तव्यों (धर्म) का पालन बिना किसी स्वार्थ के करता है, तो मन स्वतः शांत होने लगता है। अनुशासनहीनता और अनैतिक कार्य मन में अशांति और ग्लानि पैदा करते हैं। * संतोष का भाव: श्री राम के अनुसार, जो प्राप्त है वही पर्याप्त है। राज्याभिषेक की तैयारी हो या वनवास का आदेश, राम जी के मुख की चमक और मन की शांति एक समान रही। जब मनुष्य बाहरी परिस्थितियों पर निर्भर रहना छोड़ देता है और संतोष धारण करता है, तो मन की चंचलता शांत हो जाती है। * सत्य और धैर्य: विकट परिस्थितियों में भी सत्य का साथ न छोड़ना और धैर्य बनाए रखना मन को स्थिरता देता है। राम जी ने 14 वर्ष के वनवास को धैर्य के साथ स्वीकार किया, जिससे यह सिद्ध होता है कि कठिन समय में भी शांत रहकर ही सही निर्णय लिए जा सकते हैं। * अहंकार का त्याग: मन की अशांति का सबसे बड़ा कारण 'मोह' और 'अहंकार' है। श्री राम ने रावण के अहंकार का विनाश किया, जो यह संदेश देता है कि जब तक भीतर 'मैं' और 'मेरा' का भाव रहेगा, मन भटकता रहेगा। विनम्रता और समर्पण से ही आंतरिक शांति संभव है। * संगति और सत्संग: प्रभु श्री राम हमेशा ऋषियों, मुनियों और संतों की संगति में रहे। अच्छे विचारों और विद्वान लोगों के सान्निध्य में रहने से नकारात्मक विचार दूर होते हैं और बुद्धि शुद्ध होती है, जो मन को शांत करने के लिए अनिवार्य है। * समान दृष्टि (समभाव): श्री राम ने मित्र और शत्रु, सुख और दुख, तथा महल और कुटिया को समान दृष्टि से देखा। जब व्यक्ति लाभ-हानि या जय-पराजय में अपना मानसिक संतुलन नहीं खोता, तो उसका मन समुद्र की तरह गहरा और शांत हो जाता है। * शरणागति और भक्ति: राम जी के अनुसार, स्वयं को ईश्वर के चरणों में समर्पित कर देना ही शांति का अंतिम मार्ग है। जब भक्त यह मान लेता है कि सब कुछ परमात्मा की इच्छा से हो रहा है, तो उसके मन का सारा बोझ और चिंता समाप्त हो जाती है।
जय श्री राम - ShareChat